
ठाणे ( यूनिस खान ) महावितरण प्राइमरी स्कूलों से कमर्शियल रेट पर बिजली बिल ले रहा है और ये स्कूल प्रशासन के लिए बोझ बन रहे हैं। स्टूडेंट्स को ज़रूरी और मॉडर्न फैसिलिटी देने के लिए इन बिजली बिलों का पेमेंट डोमेस्टिक रेट पर करने का सुझाव देते हुए, विधायक संजय केलकर ने एजुकेशनल प्रॉब्लम पर बात की है।
विधायक संजय केलकर ने अधिवेशन में स्टूडेंट्स, स्कूल मैनेजमेंट, टीचर्स और पेरेंट्स के सामने आने वाले अलग-अलग इश्यू पर चर्चा की और कुछ सुझाव दिए। इस बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में क्लास 12 के 1.5 मिलियन स्टूडेंट्स, 23 हज़ार सेकेंडरी स्कूल और 11 हज़ार जूनियर कॉलेज हैं। खासकर, क्लास 1 से 5 तक लगभग 1.5 करोड़ स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। इसलिए, विधायक केलकर ने राज्य में एजुकेशन की नींव मज़बूत करने के लिए अलग-अलग स्कीम लागू करने की ज़रूरत बताई।
प्राइमरी स्कूल उन्हें मिलने वाली ग्रांट पर चलते हैं। इन स्कूलों में स्टूडेंट्स को अलग-अलग एजुकेशनल फैसिलिटी दी जाती हैं। लेकिन, महावितरण जो बिजली बिल लेता है, वह कमर्शियल रेट पर है, इसलिए सब्सिडी से यह खर्च पूरा करना नामुमकिन है। ऐसे में, अगर बिजली का बिल नहीं भरा जाता है, तो बिजली काट दी जाती है, जिससे स्टूडेंट्स की सुविधाएं बंद हो जाती हैं और वे मॉडर्न एजुकेशन से दूर हो जाते हैं। इसलिए, विधायक केलकर ने मांग की कि महावितरण इन स्कूलों को डोमेस्टिक रेट पर बिजली का बिल दे।
फिलहाल, टीचर्स ऑर्गनाइज़ेशन्स ने टीईटी एग्जाम को लेकर अग्रेसिव रुख अपनाया है। हालांकि टीचर्स को इस एग्जाम से कोई एतराज़ नहीं है, लेकिन ऑर्गनाइज़ेशन्स को इसे लागू करने के तरीके पर एतराज़ है। इसलिए, विधायक केलकर ने डर जताया कि आने वाले समय में आंदोलन की वजह से करीब 80 परसेंट स्कूल खाली हो जाएंगे। कोर्ट के दिए फैसले के मुताबिक, टीचर्स को अगस्त 2028 तक यह एग्जाम देने की इजाज़त दी जानी चाहिए। विधायक केलकर ने सुझाव दिया कि सीनियर टीचर्स को एग्जाम न देने की वजह से प्रमोशन से दूर नहीं किया जाना चाहिए।


