
ठाणे ( यूनिस खान ) भारत चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के एसआईआर समेत नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म में नियमों को बदलने के ज्ञानेश कुमार के फैसले पर 14 बार एतराज़ जताने के बावजूद, ज्ञानेश कुमार ने तानाशाही तरीका अपनाया है। इसे डेमोक्रेसी की हत्या बताते हुए, राकांपा शरदचंद्र पवार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. जितेंद्र आव्हाड की मौजूदगी में और जिला अध्यक्ष मनोज प्रधान की लीडरशिप में ठाणे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के प्रतीक को गधे पर बैठकर कोड़े मारते हुए यात्रा निकली गई। इस दौरान सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी दोनों को सम्मानित किया गया। 23 सितंबर को मीडिया में हुए एक बड़े खुलासे में बताया गया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के अंदरूनी मामलों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आयोग के तीन में से दो मेंबर, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर अपनी कड़ी नाराज़गी और एतराज़ जताते हुए 14 बार चिट्ठी लिखी है। इस बड़े खुलासे के बाद देश की पॉलिटिक्स में बड़ी हलचल मच गई है। राकांपा-शरदचंद्र पवार पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अग्रेसिव स्टैंड ले लिया है। सोमवार दोपहर को राकांपा-शरदचंद्र पवार पार्टी ऑफिस से ठाण मनपा मुख्यालय तक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च निकाला गया। इस मार्च में ज्ञानेश कुमार बने व्यक्ति को गधे पर बिठाकर जुलूस निकाला गया। गधे के गले में एक प्लेकार्ड लटकाया गया था, जिस पर लिखा था, “चांद के पार एक… गधे पर ज्ञानेश कुमार”। इस बीच, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी बने दो लोग घोड़ों पर सवार थे। डॉ. जितेंद्र आव्हाड और मनोज प्रधान ने डेमोक्रेसी बचाने की कोशिश करने के लिए उनके गले में फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए, जैसे, “ज्ञानेश हटाओ, चुनाव आयोग बचाओ; देशद्रोही राजीव और ज्ञानेश कुमार को जूते मारो; ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो; लोकतंत्र की हत्या बंद करो!; वोट चोर, सिंहासन छोड़ दो, एक, दो, तीन, चार, ज्ञानेश कुमार को जेल में डालो; भारत चुनाव आयोग के वोट चोर है, लोकतंत्र का हत्यारा है; एक चांद पर है, ज्ञानेश कुमार गधे पर है; एसआईआर हटाओ, देश बचाओ; ज्ञानेश कुमार चोर है, मोदी-शाह चोर पर मोर है।”
इस मौके पर डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने कहा, संविधान कहता है कि तीनों चुनाव अधिकारियों को संविधान ने समान अधिकार दिए हैं। इसलिए, अगर किसी फैसले पर दोनों एक ही तरफ हैं, तो बहुमत का फैसला मानना चाहिए। संधू और जोशी ने 14 आपत्तियां उठाई हैं, उन 14 आपत्तियों को स्वीकार करने के बाद, सभी फैसलों को 2:1 के अनुपात में स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। जब दो चुनाव आयुक्त कहते हैं कि सर्वर हैक हो गया है, वोटर रोल में स्कैम है, वोटर लिस्ट में स्कैम है। दिल्ली में एक आईटी डिपार्टमेंट पर एक सांप आकर बैठ गया है, वह सांप उस पर बैठा है, उसकी सांस रोके हुए है। दिल्ली के लोग नंदुरबार के गांव में तय कर रहे हैं कि वोटर कौन होना चाहिए। जैसे बंगाल में एसआईआर में नाम हटाए गए, वैसे ही महाराष्ट्र में भी दो करोड़ नाम हटाए गए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पार्लियामेंट की परमिशन के बिना फॉर्म 6 में बदलाव करके संविधान को रौंदने की कोशिश की है। उन्होंने कहा हालांकि, हम एक बार अपनी जान दे देंगे लेकिन संविधान को रौंदने नहीं देंगे। इस देश के लोगों का चुनाव आयोग पर से भरोसा उठ गया है। इसलिए, अब वे मांग करते हैं कि संधू और जोशी द्वारा उठाए गए 14 आपत्तियों को तुरंत माना जाए और उनमें सुधार किया जाए और ज्ञानेश कुमार को हटाया जाए।
जिलाध्यक्ष मनोज प्रधान ने कहा कि चुनाव आयुक्त को किसी भी पार्टी के असर से फ्री होना चाहिए। उसके कामकाज में भरोसा बनाने के लिए अपॉइंटमेंट प्रोसेस में ज्यादा ट्रांसपेरेंसी और इंस्टीट्यूशनल ऑटोनॉमी जरूरी है। नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म नंबर 6 में हुए बदलाव के बारे में आम लोगों और संबंधित लोगों को क्यों नहीं बताया गया? देश के युवा बेरोजगारी, महंगाई, हेल्थ और एजुकेशन की समस्याओं से परेशान हैं। इन बदलावों का विरोध रूलिंग क्लास को सहना पड़ेगा। इसलिए मोदी-शाह ने ज्ञानेश कुमार के ज़रिए उनके वोट के अधिकार को कमज़ोर करने की कोशिश शुरू कर दी है। इसलिए उन्हें नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में और आसानी और ट्रांसपेरेंसी लानी चाहिए, उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाकर तुरंत जेल में डाला जाए। इस विरोध प्रदर्शन में विपक्षी नेता अशरफ शानू पठान, महिला अध्यक्ष मनीषा भगत, महिला वर्किंग अध्यक्ष फूलबानो पटेल, युवा अध्यक्ष और ग्रुप लीडर अभिजीत पवार, ठाणे ज़िले के वर्किंग अध्यक्ष प्रकाश पाटिल, पूर्व परिवहन समिति सदस्य शमीम खान, मुंब्रा वार्ड कमेटी अध्यक्ष दीपाली भगत, नगरसेवक यासीन कुरैशी, नगरसेवक पल्लवी जगताप, मकसूद खान, मिलिंद बनकर, युवा वर्किंग अध्यक्ष राजेश कदम, जनरल सेक्रेटरी राजेश साटम वगैरह शामिल हुए।


