
ठाणे ( यूनिस खान ) राकांपा शरदचंद्र पवार पार्टी में जोरदार एंट्री शुरू हो गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और राष्ट्रीय महासचिव डॉ. जितेंद्र आव्हाड की सबको साथ लेकर चलने वाली सोच को अपनाते हुए, बिपिन गहलोत समेत ठाणे में अलग-अलग पार्टियों के करीब 350 कार्यकर्ता राकांपा-शरदचंद्र पवार पार्टी में शामिल हुए। जिला अध्यक्ष मनोज प्रधान ने गहलोत का पार्टी में स्वागत किया। इस बीच, डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि आरक्षण के खिलाफ बोलने वाले लोग इस बार हमारे दुश्मन हैं।
बिपिन गहलोत ने खारटन रोड, ठाणे पूर्व, वागले एस्टेट जैसे इलाकों में कार्यकर्ताओं का एक नेटवर्क बनाया है। गहलोत ने कहा कि डॉ. जितेंद्र आव्हाड आज के समय में शोषित, दबे-कुचले और दलित वर्ग के एकमात्र होनहार नेता हैं। पार्टी में एंट्री का कार्यक्रम सिडको बस स्टॉप के कोली समाज हॉल में हुआ। इस मौके पर राकांपा-शरद चंद्र पवार पार्टी के मुख्य पदाधिकारी मौजूद थे, जिनमें पार्टी नेता अभिजीत पवार और वीरू वाघमारे भी शामिल थे। इस मौके पर करीब 16 महिला बचत गुट भी राकांपा-शरदचंद्र पवार पार्टी में शामिल हुए। मनोज प्रधान ने उन सभी का पार्टी का मफलर पहनाकर स्वागत किया।
इस मौके पर डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि आज 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस है। आज के दिन भारत आजाद हुआ था। लेकिन पिछले कुछ दिनों में इस देश में जो घटनाएं हुई हैं, उससे मन में बहुत दर्द हुआ है। हम आजाद तो हो गए हैं, लेकिन हमारी मानसिकता में सुधार नहीं हुआ है। कुछ दिन पहले, एक आदमी उठा और उसने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भूषण गवई पर, जो एक पिछड़े वर्ग से थे, चप्पल फेंकी। क्योंकि, आप इस कुर्सी पर कैसे बैठ सकते हैं? उनका सवाल था। लेकिन, हम कहते हैं, वह कुर्सी किसके बाप के लिए लिखी है? पिछले 15 दिनों में सबसे बुरी बात यह हुई है कि कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे, जो खुद भी एक पिछड़े वर्ग से हैं, जिस जगह पर भाषण देने गए थे, वहां उन्होंने यज्ञ किया और कुछ लोगों ने उस जगह को पवित्र करने का कार्य किया।
भारत आज़ाद हो गया। लेकिन जब तक हम जाति की सोच से बाहर नहीं निकलेंगे, आम आदमी आज़ादी का सही मतलब नहीं समझेगा। गांधी और नेहरू ने हमें आज़ादी दी। हमारे डॉ. बाबासाहेब ने हमें संविधान दिया और बराबरी का पाठ पढ़ाया, लेकिन आज इस देश में इस संविधान को खत्म करने का पाप करने वाले लोग बढ़ रहे हैं। हमारी लड़ाई इसी सोच के खिलाफ है। यह लड़ाई, कोई माने या न माने, मनुवाद के खिलाफ है। हमारा ब्राह्मणों से कोई विरोध नहीं है। लेकिन हम मनुवाद का विरोध करते रहेंगे। चाहे हमारी जान चली जाए, हम गैर-बराबरी वाले मनुवाद का विरोध करते रहेंगे। हम उस मनुस्मृति को नहीं मानेंगे जो औरत को औरत नहीं मानती, उसे सिर्फ़ इस्तेमाल की चीज़ मानती है।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने सबसे पहले मनुस्मृति जलाई थी। उन्होंने ही सबसे पहले औरतों को हक़ दिए थे। उन्होंने ही सबसे पहले रिज़र्वेशन दिया था। आज भी अगर जस्टिस गवई को चप्पलें पड़ रही हैं और खरगे के लिए कुर्बानी दी जा रही है, तो आप ही बताइए कि रिज़र्वेशन की ज़रूरत है या नहीं! जो लोग रिज़र्वेशन के ख़िलाफ़ बोलते हैं, रिज़र्वेशन हटाने की बात करते हैं, वे आपके और हमारे दुश्मन हैं, यह याद रखना। यह भी डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने कहा है। इस समय स्टेज पर मकसूद खान, फूलबानो पटेल और दूसरे लोग मौजूद थे।


