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महाराष्ट्र में ‘लैंड टाइटलिंग एक्ट’ पर ऐतिहासिक फैसला जल्द – चंद्रशेखर बावनकुले 

ठाणे ( यूनिस खान ) महाराष्ट्र में प्रॉपर्टी के लेन-देन में ट्रांसपेरेंसी लाने के लिए, दुबई और सिंगापुर की तर्ज पर ‘लैंड टाइटलिंग एक्ट’ लागू किया जाएगा और हर प्रॉपर्टी मालिक को सरकार से मंज़ूर प्रॉपर्टी कार्ड दिया जाएगा। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को ठाणे में एक ज़रूरी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ऐसा कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य होगा और इस बारे में आने वाले दिसंबर में नागपुर सेशन में फैसला लिया जाएगा।

           वह ठाणे डिस्ट्रिक्ट हाउसिंग फेडरेशन और विधायक संजय केलकर के ‘ठाणे सिटी सोसाइटी फोरम’ के साथ मिलकर गडकरी रंगायतन में आयोजित एक बड़े सम्मान समारोह में बोल रहे थे। इस मौके पर विधायक संजय केलकर, एड निरंजन डावखरे, किसन कथोरे, माधवी नाइक, कुमार ऐलानी, विक्रांत पाटिल, जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल, हाउसिंग फेडरेशन के प्रेसिडेंट और नगर सेवक सीताराम राणे, भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप लेले, उपमहापौर कृष्णा पाटिल, नगर सेवक विकास पाटिल, अमित सरैया और कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

         विधायक संजय केलकर के विधानसभा में उठाए गए मुद्दों की वजह से, राजस्व विभाग ने ब्रिटिश ज़माने के कई नियमों को बदलते हुए 65 से ज़्यादा फ़ैसले लिए हैं और 98 मुद्दों को कैबिनेट से मंज़ूरी मिली है, ऐसा मंत्री बावनकुले ने कहा है। नए लैंड टाइटलिंग सिस्टम से, प्रॉपर्टी के पिछले सभी ट्रांसफर के रिकॉर्ड के बजाय, मौजूदा मालिक, उनके वारिसों, जमाबंदी और प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी वाला एक डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार की गारंटी वाला यह कार्ड देश और विदेश में डेबिट और क्रेडिट कार्ड की तरह एक भरोसेमंद डॉक्यूमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

      इसके अलावा, ‘पहले गिनती करो, फिर रजिस्टर करो’ का नियम लागू किया जाएगा और बिना गिनती के कोई भी प्रॉपर्टी का लेन-देन नहीं होगा। शहरों में हाउसिंग सोसाइटियों में हर फ्लैट होल्डर को एक अलग ‘वर्टिकल प्रॉपर्टी कार्ड’ देने का भी ऐलान किया गया। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए कानूनों में बदलाव किया जाएगा।

          उन्होंने यह भी बताया कि राजस्व विभाग ने नॉन-एग्रीकल्चरल (एनए) परमिशन की ज़रूरत को खत्म करने, फ्रैगमेंटेशन एक्ट में बदलाव करने, 1 जनवरी, 2011 से पहले के बिना इजाज़त कंस्ट्रक्शन को रेगुलेट करने, सरकारी ज़मीन पर इजाज़त पाने वालों को घर देने और कल्याण-आसनगांव चौथी रेलवे लाइन, दहिसर-भायंदर कोस्टल रोड, मेट्रो कार शेड, रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस, कंडलवन कंजर्वेशन और बापगांव सब्जी मंडी के लिए भी ज़मीन देने का फैसला किया है।

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