
ठाणे ( यूनिस खान ) तापमान बढ़ने व अनियमित होती बारिश को लेकर बदलते मौसम और पर्यावरण संवर्धन व संरक्षण की चर्चा होने लगती है। शासन, प्रशासन और पर्यावरण प्रेमी भी सक्रिय होते दिखाई देने लगते है। हालांकि बहुत सारे पर्यावरण प्रेमी ऐसे भी है जो पर्यावरण के लिए नियमित कार्य तो करते है लेकिन वे चर्चा में नहीं आते। ऐसे ही एक पर्यावरण प्रेमी सत्यनारायण शर्मा का उल्लेख करना जरूरी है जो हर मौके को वृक्षारोपण के साथ पर्यावरण का कार्य करते हैं। सत्यनारायण शर्मा ठाणे में रहकर यहां येउर के जंगल, सोसायटी के कंपाउंड और अन्य स्थान में वृक्षारोपण करते और उन्हें पानी देने का कार्य करते हैं। जब वे गांव जाते हैं तो वहां नीम के पौधों का रोपण करते है। नीम शुद्ध हवा और औषधीय छाया देने के लिए जानी जाती है। जो ग्रामीण आवासीय क्षेत्र के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है। इसलिए सत्यनारायण शर्मा नीम के पौधों का रोपण करने को प्राथमिकता देते हैं। उनका कहना है कि जल ही जीवन है यह सब जानते हैं और जीवन के लिए लोग हर संभव प्रयास भी करते है। जल ही जीवन है और पर्यावरण से जीवन और पानी मिलता है। पर्यावरण के लिए वृक्षारोपण करना और पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले कारकों को रोकने में अपनी हिस्सेदारी होना चाहिए। उनका कहना है कि बढ़ते तापमान और अनियमित होती बारिश की समस्या को टालने के लिए शासन, प्रशासन के साथ ही समाज के सभी घटकों को अपने अपने स्तर पर पर्यावरण संवर्धन , संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए अपने सामाजिक कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनके एक भाई ओमप्रकाश शर्मा भाजपा से जुड़कर राजनीति में सक्रिय रहे, जिन्हें दो बार भाजपा की राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने का अवसर मिला। उन्होंने संयुक्त ठाणे , पालघर जिले के आदिवासी ग्रामीण इलाके को अपना कार्य क्षेत्र बनाकर वहां के विकास में जुट गए। वहीं दूसरे भाई एड बी एल शर्मा वकालत करते हुए सामाजिक और साहित्यिक क्षेत्र में आजीवन सक्रिय रहे। यही कारण था कि दोनों के बड़े भाई होने के नाते उनके कार्यों में साथ देते रहे और अपना पर्यावरण प्रेम और अपने कार्यों का कभी खुलकर प्रदर्शन न कर पर्यावरण के लिए कार्य करते रहे हैं।


