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शराब कारोबारी राजू जायसवाल को सुप्रीम कोर्ट का झटका

ठाणे [ युनिस खान ] 2 फरवरी को उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने शहर के गांधी चौक स्थित विदर्भ शराब दुकान के लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करने के मामले में मृत व्यक्ति को जिंदा दिखाने के मामले में शराब कारोबारी राजेंद्र बृजकिशोर जायसवाल की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।  उन्होंने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दी और उन्हें सात दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।

           वर्ष 1973 में, राज्य सरकार ने अमरावती जिले के दरियापुर तालुका के मौजे कडाशी निवासी स्वर्गीय पुरुषोत्तम तुलसीराम गावंडे के नाम पर देशी और विदेशी शराब बेचने का लाइसेंस स्वीकृत किया था। चूंकि अकेले शराब का कारोबार शुरू करना संभव नहीं था, इसलिए अकोला निवासी बृजकिशोर जायसवाल के साथ साझेदारी में 1976 में विदर्भ वाइन शॉप के नाम से अकोला में शराब का कारोबार शुरू किया गया था। फिर 1987 में उनके दूसरे साथी बृजकिशोर जायसवाल का निधन हो गया। उसके बाद उनके बेटे राजेंद्र बृजकिशोर जायसवाल को व्यवसाय में भागीदार के रूप में पहचाना गया। मूल अनुज्ञप्तिधारी पुरुषोत्तम गावंडे की मृत्यु के साथ ही विदर्भ शराब दुकान की साझेदारी नियमानुसार समाप्त हो गई, लेकिन राजेंद्र बृजकिशोर जायसवाल ने पुरुषोत्तम गावंड की मौत की बात को छुपाकर अवैध रूप से शराब के लाइसेंस का नवीनीकरण किया। इस मामले में अकोला जिला कलेक्टर नीमा अरोड़ा ने विदर्भ शराब की दुकान के जीर्णोद्धार के लिए जाली दस्तावेज जमा कर दुकान को सील कर कानूनी वारिसों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया।  दुकान के जीर्णोद्धार के लिए फर्जी हस्ताक्षर व जाली दस्तावेज जमा कराये गये। शहर कोतवाली थाने में नवंबर 2021 में शिकायत दर्ज कर उक्त शिकायत पर धारा 420, 461, 468, 471 और 409 के तहत मामला दर्ज किया गया है।  राजेंद्र जायसवाल ने जिला अदालत में अर्जी देकर मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत की मांग की थी, लेकिन अकोला जिला सत्र न्यायालय ने जमानत खारिज कर दी थी। हालांकि 2 फरवरी 2022 को राजेंद्र जायसवाल की जमानत अर्जी को नागपुर हाई कोर्ट के जज सुरेंद्र पंढरीनाथ तावड़े ने खारिज कर दिया था। कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश में मूल लाइसेंस धारक की मृत्यु के बाद भी 18 साल तक सरकार को अंधेरे में रखते हुए साझेदारी जारी रखने और लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की जांच करने का भी आदेश अधिकारी को दिया है। न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि भागीदारी खत्म होने के बाद भी आरोपी ने शराब विक्री का व्यवसाय शुरू रखा और मूल परवाना धारक को किसी भी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं दिया। आरोपी ने भागीदार की मृत्यू की बात को प्रशासन को अंधेरे में रखकर हर साल लाइसेंस नूतनीकरण करवाकर शराब बिक्री का व्यवसाय किया।
न्यायालय ने आदेश में आरोपी की ओर से दी गई दलील में 10 वर्षों तक पुरुषोत्तम गावंडे के वारिसों की जानकारी न होने बात आरोपी के वकील एड. आनंद देशपांडे की ओर से बताई गई, परन्तु उक्त दलील काम नहीं आई. कुल मिलाकर आरोपी की पुलिस जांच होनी जरूरी है, ऐसा न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है।  फर्जी कागजात पेश करने के संबंध में आरोपी की जांच जरूरी है।  सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी राजेंद्र जयस्वाल का जमानत याचिका खारिज कर दी। वादी की ओर से एड. रणजित कुमार एवं एड. निशांत कतनेश्वरकर ने दलीलें दी, वहीं प्रतिवादी की ओर से ए़ड. सिद्धार्थ दवे, एड. साक्षी कक्कर, एड. शक्ति सिंग और एड. आरुषी सिंग ने अपना पक्ष पेश किया।

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