
ठाणे ( यूनिस खान ) विश्व पर्यावरण दिवस पर हज़ारों पौधे लगाने का ऐलान किया जाता है; लेकिन कोई यह हिसाब नहीं देता कि साल भर में कितने बड़े पेड़ बचाए गए। एक तरफ पेड़ लगाने का ढिंढोरा और दूसरी तरफ डेवलपमेंट के नाम पर हरियाली का कत्ल, यही आज की एनवायरनमेंटल ट्रेजेडी है। यह बात पर्यावरण अभ्यासक डॉ प्रशांत सिनकर ने कहा है।
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, ठाणे क्रीक कोस्ट फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की तरफ से ठाणे ईस्ट में मीठबंदर रोड, स्वामी समर्थ मठ मार्ग पर मैंग्रोव प्लांटेशन की पहल की गई। इस मौके पर पर्यावरण अभ्यासक डॉ. प्रशांत सिनकर, फॉरेस्ट एरिया ऑफिसर मनीष पवार समेत बड़ी संख्या में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के कर्मचारी और आम लोग मौजूद थे।
पर्यावरण अभ्यासक डॉ सिनकर ने कहा कि पर्यावरण संवर्धन व संरक्षण और वृक्षारोपण करने का ढिंढोरा तो बहुत पीटा जाता है लेकिन इसके लिए आवश्यक प्रयास नहीं किया जाता है। विकास के नाम पर विनाश और अपने लाभ के लिए पर्यावरण को दरकिनार किया जाता है। बड़े पेड़ों को काटकर पौधे लगाने का दिखावा तो बहुत किया जाता है लेकिन कितने पौधे तैयार होते है इसे देखने की किसी को फुर्सत नहीं है।
वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन , वर्षा जल संचय जैसे विषय के मद्देनजर आज की परिस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ सिनकर ने कहा है कि इन विषयों पर अधिक जनजागरण की आवश्यकता है। जब लोगों में जागरूकता आ जाएगी और लोग सजग होंगे तो पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वालों को रोकने में मदद मिलेगी। बड़े पेड़ों की कटाई और प्रदूषण को रोकने के लिए शासन प्रशासन को सतर्क रहने की अपील करते हुए डॉ प्रशांत सिनकर ने लोगों से आगे आने का आह्वान किया है।


