
मुंबई ( यूनिस खान ) केंद्र सरकार की गलत नीतियों और उपाय योजना के अभाव में देश में गंभीर समस्याओं से नागरिकों को जूझना पड़ रहा है। देश में उत्पन्न समस्यों और सरकार की जनविरोधी कार्य प्रणाली के खिलाफ इंडिया गठबंधन को संगठित होकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने की जरूरत है। उत्तर मुंबई जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव कमलाकांत त्रिपाठी ने यह बात कही है। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि एनडीए सरकार को केवल छोटे, प्रतीकात्मक और बिखरे हुए आंदोलनों से चुनौती देना संभव नहीं है। इसके लिए विरोधी दलों को एकजुट होकर इंडिया गठबंधन को सड़क पर उतरकर जन आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा। मीडिया से बातचीत में त्रिपाठी ने आगे कहा कि वर्ष 2014 के बाद से एनडीए ने लगातार अपने संगठन और गठबंधन को मजबूत किया है। आज एनडीए 36 से अधिक सहयोगी दलों के साथ एक राजनीतिक शक्ति के रूप में खड़ा है। इसके विपरीत विपक्षी इंडिया गठबंधन अभी भी आपसी तालमेल, स्पष्ट नेतृत्व और ठोस रणनीति के अभाव से जूझ रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कई राज्यों में सहयोगी दलों का एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ना विपक्ष की अंदरूनी कमजोरी और समन्वय की कमी को उजागर करता है।
त्रिपाठी ने कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत और संगठित विपक्ष का होना बेहद आवश्यक है, लेकिन वर्तमान में विपक्ष अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाने में असफल दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाने, जनआंदोलनों पर प्रतिबंध लगाने और जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे माहौल में विपक्ष को और अधिक एकजुट और आक्रामक रणनीति अपनाने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर विपक्ष वास्तव में एनडीए को चुनौती देना चाहता है, तो उसे केवल बयानबाजी या सीमित स्तर के विरोध तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देशभर में व्यापक स्तर पर ‘जेल भरो आंदोलन’ जैसे बड़े और प्रभावी जनआंदोलन खड़े करने होंगे, जिससे सरकार पर वास्तविक दबाव बनाया जा सके और जनता की आवाज को मजबूती मिले। अंत में त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक परिवर्तन के लिए केवल आलोचना पर्याप्त नहीं होती, बल्कि मजबूत जनसमर्थन, स्पष्ट दिशा और विपक्षी दलों के बीच सच्ची एकजुटता जरूरी होती है। जब तक विपक्ष इन मूलभूत बातों पर ध्यान नहीं देगा, तब तक एनडीए को प्रभावी चुनौती देना संभव नहीं होगा।


