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 मैं एक उपमुख्यमंत्री के साथ ही मनपा स्कूल का पूर्व विद्यार्थी हूँ – एकनाथ शिंदे 

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्कूल प्रवेशोत्सव में पुरानी यादें ताज़ा कीं

ठाणे ( यूनिस खान ) ठाणे मनपा स्कूल नंबर 23 में शैक्षणिक 2026-27 के पहले दिन आयोजित प्रवेशोत्सव में विद्यार्थियों से बात करते हुए, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनसे बड़े सपने देखने और पक्का इरादा, लगन और कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त करने की अपील की। ​​इस मौके पर, उन्होंने याद दिलाया कि वह भी इसी मनपा स्कूल के विद्यार्थी हैं।

           गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल के पहले दिन हुए प्रोग्राम में महापौर शर्मिला पिंपलोलकर, ठाणे मनपा आयुक्त सौरभ राव, अतिरिक्त आयुक्त संदीप मालवी, नगर सेवक राम रेपाले, संध्या मोरे, मुख्याध्यापक दीपक मोरालकर, टीचर्स, पेरेंट्स और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे। इस मौके पर बोलते हुए शिंदे ने कहा कि स्कूल वो8द्वार्थियो के सुनहरे भविष्य का रास्ता है। पहले दिन का जोश बनाए रखते हुए विद्यार्थियों को हंसी-खुशी पढ़ाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पढ़ाई सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक अच्छा नागरिक बनाने का प्रोसेस है।

          टीचर्स की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता जन्म देते हैं; लेकिन टीचर्स स्टूडेंट्स को बनाने और उनमें संस्कार डालने का काम करते हैं। इसलिए समाज में टीचर्स की जगह सबसे अलग है। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स का भविष्य बनाने की टीचर्स की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है और उन्हें स्टूडेंट्स को ज्ञान के साथ-साथ संस्कार भी देने चाहिए। इस मौके पर उन्होंने अपनी स्कूल लाइफ को भी याद किया। उन्होंने कहा, “मैं इस स्कूल नंबर 23 का स्टूडेंट था। उस समय स्कूल के हालात अलग थे। आज के स्टूडेंट्स को मॉडर्न बिल्डिंग, अच्छी फैसिलिटी और अच्छा माहौल मिल रहा है। लेकिन हालात से ज़्यादा ज़रूरी पक्का इरादा और मेहनत है।” उन्होंने अपने टीचर्स की यादें भी शेयर कीं।

       मनपा, ज़िला परिषद या सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स से खुद को कमतर न समझने की अपील करते हुए, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. अनिल काकोडकर और कई दूसरी महान हस्तियों के उदाहरण दिए जो ऐसे ही स्कूलों से निकले थे। उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई की क्वालिटी और टीचर्स का कमिटमेंट ज़रूरी है और स्कूल के नाम के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह कहते हुए कि मातृभाषा में पढ़ाई से स्टूडेंट्स की समझने की क्षमता बढ़ती है, उन्होंने कहा कि आउटडोर गेम्स, प्रार्थना, कॉम्पिटिशन और कल्चरल एक्टिविटीज़ के ज़रिए स्टूडेंट्स का ऑल-राउंड डेवलपमेंट हो रहा है। आजकल आउटडोर गेम्स की संख्या में कमी पर अफ़सोस जताते हुए, उन्होंने बच्चों से मोबाइल फ़ोन की लत में पड़े बिना गेम्स और पढ़ाई के बीच बैलेंस बनाने की भी अपील की।

         उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के “मुख्यमंत्री माझी शाला सुंदर शाला” कैंपेन से राज्य के स्कूलों में बड़े बदलाव आए हैं और सरकार स्टूडेंट्स को अच्छी शिक्षा और ज़रूरी सुविधाएँ देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार स्कूल न्यूट्रिशन जैसी कई स्कीमों के ज़रिए स्टूडेंट्स पर पढ़ाई का बोझ कम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने टीचर्स से अपील की कि वे पहली से आखिरी बेंच तक सभी स्टूडेंट्स पर बराबर ध्यान दें, उनमें सीखने की चाहत जगाएँ और आसान भाषा में पढ़ाएँ। उन्होंने स्टूडेंट्स को सलाह दी, “सवाल पूछने वाला स्टूडेंट ही असली इंटेलिजेंट होता है। इसलिए, अगर आपको कुछ समझ में न आए, तो बेझिझक टीचर से पूछें।

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