
ठाणे ( यूनिस खान ) टीडीआर स्कैम की वजह से जहां ठाणे मनपा के साथ-साथ फॉरेस्ट डिपार्टमेंट भी मुश्किल में है, वहीं अब ठाणे मनपा का एक और बड़ा खुलासा हुआ है। अमेजॉन का मेगा डेटा सेंटर, जिसे अमेरिका के कुछ राज्यों और यूरोप के कुछ देशों ने बैन कर दिया था, ठाणे में बनने वाला है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि इस डेटा सेंटर से नौकरियां मिलेंगी, लेकिन सिर्फ 60 लोगों को नौकरियां मिलेंगी और बदले में 600 ठाणेकरों को खतरे में डाला जाएगा। जबकि आयुक्त ने बजट में पहले ही माना है कि 30 एमएलडी पानी की कमी है। ठाणे के हिस्से का 12 एमएलडी पानी इस डेटा सेंटर को दिया जाएगा। इसका राकांपा सदन से सड़क तक विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि ठाणे के लोग अनलिमिटेड बिजली की खपत और नॉइज़ पॉल्यूशन से तंग आ चुके हैं। इसलिए, हम इस सेंटर का ज़रूर विरोध करेंगे। हम न सिर्फ़ विधानसभा में विरोध करेंगे, बल्कि इसके खिलाफ लोगों के साथ भी खड़े होंगे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व विधायक डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसी चेतावनी दी है। इस बीच, ज़िला अध्यक्ष मनोज प्रधान ने कहा कि यह डेटा सेंटर ठाणे के लोगों के ख़िलाफ़ आया है और इससे बड़े पैमाने पर एनवायरनमेंटल डैमेज भी होगा। इसलिए, हम इस डेटा सेंटर के ख़िलाफ़ सड़कों पर और कानूनी तौर पर लड़ेंगे।
अमेजॉन ने बालकुम इलाके में कल्पतरु से 1,830 करोड़ रुपये में 53 एकड़ ज़मीन 130 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी देकर खरीदी है। यहां एक मेगा डेटा सेंटर बनाया जाएगा। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद चंद्र पवार पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह डेटा सेंटर एक राक्षस है जो ठाणे के लोगों के ख़िलाफ़ आया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रुप लीडर अभिजीत पवार और महिला प्रेसिडेंट मनीषा भगत भी मौजूद थीं। डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि नियम है कि डेटा सेंटर शहर से दूर होना चाहिए। लेकिन, यह डेटा सेंटर हाउसिंग सोसायटी, स्कूल और हॉस्पिटल के पास 54 एकड़ की जगह पर बन रहा है। चाहे रेजिडेंशियल हो या इंडस्ट्रियल, 20,000 स्क्वेयर फीट से ज़्यादा कंस्ट्रक्शन एरिया वाले किसी भी प्रोजेक्ट के लिए एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस की ज़रूरत होती है। लेकिन, इस मामले में ठाणेकरों को एनवायर्नमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट से अनजान रखा गया है।
इस शहर में पहले से ही कोई डैम नहीं है। हमें मुंबई म्नपा, स्टेम और एमआईडीसी से पानी पीना पड़ता है। अब इस पानी को अमेजॉन के गले में डालने की साज़िश हो रही है। ठाणे शहर में पहले से ही रोज़ाना 30 एमएलडी पानी की कमी है। फिर डेटा सेंटर में कूलिंग प्रोसेस के लिए ज़रूरी पीने का पानी कहाँ से लाएँगे? उन्होंने कहा कि ठाणे मनपा इसके लिए हर दिन 12 एमएलडी पानी देगा। इस बारे में हमारे जिलाध्यक्ष मनोज प्रधान ने ठाणे मनपा आयुक्त सौरभ राव को लेटर लिखकर इस प्रोजेक्ट की पानी की ज़रूरतों समेत अलग-अलग बातों की जानकारी मांगी है और इस प्रोजेक्ट को कैंसल करने की मांग की है। अभी तक महासभा के एजेंडा के साथ एब्स्ट्रैक्ट नहीं दिया गया है। जब एब्स्ट्रैक्ट मांगा जाता है तो एडिशनल कमिश्नर मालवी पर उंगली उठाई जाती है। उनका क्या रिश्ता है, यह बताया जाना चाहिए। एजेंडा पर सेक्रेटरी के साइन हैं। इसलिए, यह एब्स्ट्रैक्ट न देकर सेक्रेटरी मनीष जोशी ने कॉर्पोरेटर और ठाणेकरों के साथ धोखा किया है। इसलिए, उन्होंने मांग की कि उनके खिलाफ एक्शन लिया जाए।
यह प्रोजेक्ट वहां किया जाना चाहिए जहां कोई अर्बन सेटलमेंट न हो। क्योंकि, नॉइज़ पॉल्यूशन इतना ज़्यादा होगा कि लोगों को कान की प्रॉब्लम होगी, उनके दिमाग पर असर पड़ेगा। यह जानते हुए भी, अगर डेटा सेंटर बनाने हैं, तो आयुक्त, उपायुक्त, सहायक, महापौर, उपमहापौर के साथ-साथ आयुक्त के घर भी डेटा सेंटर के एरिया में बनाए जाने चाहिए। क्योंकि, यह सब इकॉनमिक वजह से हो रहा है। डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि इसके लिए हमारे नगर सेवक न केवल महासभा में विरोध करेंगे, बल्कि बालकुम इलाके में बैठक कर जनमत तैयार करेंगे। आने वाले सत्र में भी इस पर बात करेंगे।


