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हर एम्बुलेंस पर सरकार की डिजिटल नज़र , सरकार की एम्बुलेंस पॉलिसी जल्द – प्रताप सरनाईक

ठाणे ( यूनिस खान ) राज्य में एम्बुलेंस सर्विस को आम आदमी के लिए ज़्यादा कुशल, ट्रांसपेरेंट, सुरक्षित और आसान बनाने के लिए मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट जल्द ही ‘महाराष्ट्र स्टेट एम्बुलेंस पॉलिसी’ बनाएगा। एम्बुलेंस सिर्फ़ ट्रांसपोर्ट का साधन नहीं हैं, बल्कि इमरजेंसी में मरीज़ की जान बचाने वाली एक ज़रूरी लाइफलाइन हैं। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि इस पॉलिसी का मकसद राज्य में एम्बुलेंस के रजिस्ट्रेशन से लेकर असल सर्विस, रिस्पॉन्स टाइम, रेट तय करने और हॉस्पिटल तक पहुंचने के सिस्टम को ज़्यादा डिसिप्लिन्ड बनाना होगा।

           नए एमईएमएस 108 पार्टनरशिप प्रोजेक्ट के तहत राज्य में करीब 1,076 एम्बुलेंस चल रही हैं, और करीब 4,500 से 5,000 एम्बुलेंस प्राइवेट हॉस्पिटल, चैरिटी और एनजीओ दे रहे हैं। हालांकि, नागरिकों को इस बारे में लगातार और भरोसेमंद जानकारी होनी चाहिए कि हर एम्बुलेंस कहाँ है, क्या वह उपलब्ध है, मरीज़ तक पहुँचने में कितना समय लगेगा, उसमें क्या सुविधाएँ हैं और लिए गए किराए के लिए कौन ज़िम्मेदार है। सरनाइक ने कहा कि नई पॉलिसी में इस कमी को दूर किया जाएगा।

          प्रस्तावित सिस्टम का मकसद नागरिकों के लिए अलग-अलग चार डिजिटल सिस्टम, एम्बुलेंस ड्राइवर, एम्बुलेंस में टैबलेट, साथ ही आरटीओ और हेल्थ डिपार्टमेंट को जोड़ना है। इससे नागरिक सबसे करीब उपलब्ध एम्बुलेंस ढूँढ़ सकेंगे, उसकी सही लोकेशन देख सकेंगे, पहुँचने का अनुमानित समय समझ सकेंगे, वीडियो कॉल के ज़रिए बेसिक गाइडेंस पा सकेंगे और अनुमानित किराया जान सकेंगे। ड्राइवर के ऐप में ड्यूटी शुरू और बंद करने, कॉल स्वीकार या अस्वीकार करने, गाइडेंस, ट्रेनिंग स्टेटस और कोशिशों को रिकॉर्ड करने जैसे फ़ीचर होने का प्रस्ताव है। एम्बुलेंस में लगे टैबलेट से मरीज़ की बेसिक जानकारी, ज़रूरी निशान, इलाज का रिकॉर्ड, हॉस्पिटल से वीडियो कॉन्टैक्ट और एईडी, ऑक्सीजन, सक्शन जैसे ज़रूरी इक्विपमेंट चेक किए जा सकते हैं।

        अभी, कई प्राइवेट एम्बुलेंस के रेट साफ़ तौर पर पब्लिश नहीं होते हैं, जिससे इमरजेंसी में मरीज़ों के रिश्तेदारों को पैसे की दिक्कत होती है। प्रस्तावित पॉलिसी में हर रजिस्टर्ड एम्बुलेंस के लिए ऐप में रेट शीट पब्लिश करना ज़रूरी करने का प्रस्ताव है। एआईएस -125 कैटेगरी के हिसाब से ज़्यादा से ज़्यादा रेट बताने के साथ-साथ, राज्य सरकार नागरिकों को अनुमानित किराए का अंदाज़ा भी देगी। हर राउंड के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और ई-रसीद मिलने से लेन-देन ज़्यादा ट्रांसपेरेंट हो जाएगा। एम्बुलेंस को पहले से ही मोटर व्हीकल टैक्स से छूट मिली हुई है और नियमों के मुताबिक नेशनल हाईवे टोल में भी छूट मिलती है। सरनाइक ने बताया कि ऐसी पब्लिक छूट का फायदा उठाते हुए, नागरिकों से उम्मीद की जाती है कि उन्हें फेयर, ट्रांसपेरेंट और अकाउंटेबल सर्विस मिलेंगी।

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