
ठाणे ( यूनिस खान) वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान हमारी परंपरा और व्यवस्था का एक हिस्सा होने के साथ ही जीवन के अंतिम पड़ाव में अनादर और उपेक्षा के भी शिकार बन रहे हैं। केंद्र और राज्यों की सरकारों ने अनेक सुविधाओं और लाभ के नियम लागू किए हैं। इसके बावजूद उन्हें आवश्यक सुविधाएं मिलना कठिन होता है। वरिष्ठ समाजसेवी ओमप्रकाश शर्मा ने सरकार से मांग की है कि सरकारी ,अर्ध सरकारी कार्यालयों, नागरिक सुविधा केंद्रों, बैंकों और परिवहन सेवाओं में वरिष्ठ नागरिकों का विशेष ध्यान रखने की व्यवस्था की जाए। जिससे उन्हें बार बार चक्कर लगाने और कतार में खड़ा रहना न पड़े। वरिष्ठ समाजसेवी शर्मा ने पत्रकारों से चर्चा में कहा है कि वरिष्ठ नागरिकों सरकारी कार्यालयों और परिवहन सेवाओं में अपेक्षाकृत सुविधाएं नहीं मिलती हैं। उनके लिए सम्मानजनक सुविधा और सेवा उपलब्ध कराने के लिए सरकार को पहल कारनी चाहिए। सरकार ने 60 , 65 वर्ष की आयु के लोगों को वरिष्ठ नागरिक घोषित कर उन्हें परिवहन सेवाओं के किराए में छूट और सीट आरक्षित करने नियम लागू किया। इसी तरह वृद्धा पेंशन जैसी कई अन्य योजनाएं चलाई जा रही है। आज स्वास्थ्य सेवा, बैंकों में आर्थिक व्यौहार , पेंशन के लिए जीवन प्रमाण करना या सरकारी कार्यालयों जाने पर उन्हें प्राथमिकता नहीं मिलती और आम लोगों की तरह कतार में खड़ा होना पड़ता है। अधिकारी और कर्मचारी भी उनका ध्यान नहीं देते हैं। शर्मा ने कहा है कि ऐसे कार्यालयों में वरिष्ठ नागरिकों के काम के निपटारे , कतार से बचने और बैठने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
आज समाज में पहले की अपेक्षा वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सोच बदल रही है,उनकी उपेक्षा भी होती है। अपने जीवन के कीमती समय देश और परिवार को देने के बाद जीवन के अंतिम दौर में उन्हें सहायता और सरल सेवाओं की आवश्यकता है। जिन्होंने अपना अधिक समय देश और परिवार की सेवा लगाया है उनके कमजोर होने पर उनका विशेष ध्यान रखने की जिम्मेदारी सरकार और समाज की है। इसके लिए सरकार को चाहिए कि वरिष्ठ नागरिकों को बगैर किसी प्रतीक्षा, कतार और चक्कर लगाए योजनाओं का त्वरित लाभ मिले। जहाँ संभव हो उनके लिए विशेष अधिकार या कक्ष की व्यवस्था की जाए।


