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सुल्ताना वेलफेयर ट्रस्ट ने 315 गरीब छात्रों को 3 -3  माह की फीस उपलब्ध कराया 

ठाणे [ युनिस खान ] मुंब्रा के 315 छात्रों की तीन माह की फीस सुल्ताना वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से दी गयी है। एक कार्यक्रम में शिक्षा विशेषज्ञों के हाथों तीन माह के फीस की राशि और कई लोगों को राशन कार्ड आदि भी दिए गए।
       मुंब्रा में ठाणे मनपा के पूर्व विरोधी पक्ष नेता अशरफ शानू पठान की संस्था सुल्ताना वेलफेयर ट्रस्ट जो गरीब बच्चों को साल में दो बार तीन महीने की फीस देती है। इसके लिए  कार्यक्रम आयोजन किया गया, जिसमें सुप्रसिद्ध सी.ए. महजबीन बामने, मौलाना सगीर बरकती, ट्रस्ट अध्यक्ष सुल्ताना पठान, पूर्व नगर सेविका फरजाना शाकिर शेख, सैयद जावेद , अफाक , शाहिना , मुश्ताक पठान , एडवोकेट अब्दुल कबीर चौधरी, जावेद (समझौता) मोहशेर शेख, साकिब दाते, नाजिमुद्दीन , खान बोबिरे, अशफाक सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
इस दौरान अशरफ पठान ने कहा कि जब अल्लाह ने हमें दिया है तो उसके बंदों की मदद करना हमारा कर्ताब्त बन जाता है। मेरी नजर में आज सबसे बड़ी मदद और जरूरी काम एक छात्र की स्कूल की फीस भरने के लिए शिक्षा सहायता है। उन्होंने कहा कि देश की स्थिति को शांतिपूर्ण बनाने और मुसलमानों को अपनी स्थिति में सुधार करने के लिए केवल एक ही उपाय शिक्षा है। जब नागरिक शिक्षित होंगे, तो वे जाति, धर्म और हिंदू-मुस्लिम के बारे में नहीं बल्कि  अपने देश और विकास के बारे में सोचेंगे। इस तरह वे मानवता को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे। इस ट्रस्ट की सक्रिय सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता मरज़िया पठान ने कहा कि हमें अपने माता-पिता से यह सीख मिली है कि दूसरों की मदद करें और खासकर स्कूली छात्रों की यथासंभव मदद करें। हमारा मानना है कि यह हमारे देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए सबसे अच्छा कदम है। इसलिए आज हमने कुछ बच्चों की कुछ महीनों की फीस अपने खाते से दिया है। वहीं मौलाना हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि यह शैक्षणिक सहायता एक प्रकार का दान है जो अल्लाह को पसंद है। शिक्षा प्राप्त करना इस्लाम में बहुत महत्व रखता है और शिक्षा के रास्ते में खर्च करना भी एक अच्छा काम है। शिक्षाविद् असदुल्लाह खान ने कहा कि अगर कोई खाड़ी देशों में काम करने जाना चाहता है, तो कम से कम 10 वीं पास होना अनिवार्य है। वह दिन दूर नहीं जब 10वीं और 12वीं कक्षा पास किए बगैर आपको ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं मिलेगा। सैयद जाहिद अली ने कहा कि मरजिया पठान का यह तरीका और जनसेवा का जज्बा अपने माता-पिता से मिला है। इस तरह जो काम अशरफ पठान और उनकी बेटी आज कर रहे हैं, अगर शहर के सभी नगर सेवक इस तरह का काम करने लगें तो निश्चित रूप से शहर का कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। फीस का प्रबंध होने से बच्चा आसानी से अपनी शिक्षा पूरी कर सकेगा।

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