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ओमरॉन हेल्थकेयर ने कई बेमिसाल सुविधाओं के साथ अपनी टेलीहेल्थ सेवाओं को बनाया बेहतर

मुंबई [ अमन न्यूज नेटवर्क ] घर पर ब्लड-प्रेशर की निगरानी के लिए डिजिटल उपकरणों के निर्माण में अग्रणी 
कंपनी, ओमरॉन हेल्थकेयर इंडिया ने उपयोगकर्ताओं को शानदार डिजिटल अनुभव प्रदान करने के लिए ई बेमिसाल सुविधाओं के साथ अपने मोबाइल ऐप को अपग्रेड किया है, और अब यह कंपनी टेलीहेल्थ तथा  रिमोट पेशेंट मॉनिटरिंग के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को मजबूती प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
 कंपनी ने अपने मौजूदा मोबाइल ऐप “ओमरॉन कनेक्ट” में कई अभिनव सुविधाओं की पेशकश की है। देश भर में ओमरॉन डिजिटल बीपी मॉनिटर्स और बॉडी कंपोजिशन मॉनिटर्स का उपयोग करने वाले लाखों लोग इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं। सुविधाओं को बेहतर बनाने की इस पहल में, एक अद्वितीय हेल्थ गिफ्ट प्रोग्राम के साथ-साथ एक ऑनलाइन एवं बेहद कुशल बीपी-डायरी की शुरूआत शामिल है, ताकि मॉनिटरिंग करने वाले लोगों को पुरस्कार के तौर पर उपयोगी सामानों का उपहार दिया जा सके, साथ ही उनमें अपने घर पर सरल एवं सुविधाजनक तरीके से बीपी की निगरानी की आदत विकसित हो सके। इसमें एप्लिकेशन की डेटा मैनेजमेंट की क्षमता को बेहतर बनाने के अलावा अन्य कंपनियों के हेल्थकेयर एप्लिकेशन के साथ इंटरफेस को संभव बनाने की क्षमता भी शामिल है।

 हेल्थ गिफ्ट का उद्देश्य मॉनिटरिंग को ज्यादा दिलचस्प बनाना और इसकी अहमियत को बढ़ाना है। यह एक बेहतरीन फीचर है, जो हेल्थ कॉइन एवं टिकट जैसे रिवॉर्डज (हर बार मापने पर दिया जाता है) के साथ ओमरॉन ब्लड प्रेशर मॉनिटर और बॉडी कंपोजिशन मॉनिटर का उपयोग करके स्वास्थ्य आँकड़ों की नियमित ट्रैकिंग को प्रोत्साहित करती है। हेल्थ कॉइन एवं टिकट्स के जरिए अलग-अलग तरह के गिफ्ट्स और वाउचर्स प्राप्त किए जा सकते हैं। बीपी डायरी, उपयोगकर्ताओं को अपनी जीवनशैली के अनुसार अपने ब्लड प्रेशर को रिकॉर्ड करने की सुविधा प्रदान करती है, जिससे उन्हें मौजूदा ट्रेंड को पहचानने में मदद मिलती है तथा वे बीपी को कस्टमाइज्ड और असरदार तरीके से नियंत्रित कर पाते हैं।

 डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसे रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते नहीं हैं, तथा ऐसे मरीज समय-समय पर इनका मापन करने एवं सही उपचार के लिए घरेलू हेल्थ डेटा पर बहुत अधिक निर्भर रहते हैं। हालांकि, कई लोगों के लिए ऐसा कर पाना एक बड़ी चुनौती बन जाती है क्योंकि उन्हें इसकी तकनीकी जानकारी नहीं होती है। साथ ही, डिवाइस कनेक्ट करने योग्य नहीं होने, पिछले डेटा तक आसानी से नहीं पहुंच पाने, तथा मरीज एवं डॉक्टर के बीच वास्तविक समय में जानकारी का आदान-प्रदान करना जटिल होने की वजह से भी यह बेहद चुनौतीपूर्ण बन जाता है।

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