
मुंबई (युनिस खान ) परिवहन मंत्री एवं एसटी निगम के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक के निर्देशानुसार, नियोजन एवं निर्णय-प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करने के उद्देश्य से कर्नाटक परिवहन निगम की तर्ज पर एसटी निगम के अंतर्गत 5 क्षेत्रीय प्रभाग बनाए गए हैं। एसटी निगम के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. माधव कुसेकर द्वारा इसके क्रियान्वयन के लिए हाल ही में एक परिपत्र जारी किया गया तथा ये क्षेत्रीय प्रभाग अगले कुछ दिनों में स्वतंत्र रूप से अपने कार्यालय शुरू कर रहे हैं।
महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम अर्थात एसटी निगम के नियोजन एवं विपणन विभाग के अंतर्गत कार्यरत विभिन्न निगरानी समितियों के कार्यालय 06/12/2016 से बंद थे। लेकिन जब परिवहन मंत्री एवं एसटी निगम के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक कर्नाटक के दौरे पर थे, तो उन्होंने वहां निगम के विकेंद्रीकरण की अवधारणा को उठाया। इसलिए, उन्होंने प्रस्ताव रखा कि महाराष्ट्र एसटी निगम, जो आकार में कर्नाटक निगम से दोगुना है तथा प्रशासनिक रूप से भी बड़ा है, को भी कम से कम 5 क्षेत्रीय प्रभागों में विभाजित किया जाना चाहिए।
एसटी व्यवस्था राज्य सरकार के राजस्व विभाग पर आधारित है। वर्तमान में तीन स्तरीय संरचना लागू है, जिसमें तालुका स्तर पर डिपो, जिला स्तर पर संभागीय कार्यालय और राज्य स्तर पर केंद्रीय कार्यालय है। हालांकि, राज्य सरकार के राजस्व विभाग के विपरीत, इस तीन स्तरीय संरचना में छह प्रशासनिक प्रभाग शामिल नहीं थे। इसलिए, केंद्रीय कार्यालय से सीधे संभागीय कार्यालय से संवाद करना भौगोलिक रूप से संभव नहीं था। बेशक, स्थानीय स्तर पर परिवहन की योजना बनाने, यात्राओं और मेलों के लिए अतिरिक्त परिवहन प्रदान करने जैसे निर्णय लेने में देरी हुई या प्रशासनिक देरी के कारण एसटी के राजस्व पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, “नियंत्रण, नियोजन और समन्वय” के उद्देश्य से महामंडल के तहत 5 क्षेत्रीय प्रभाग बनाने का निर्णय लिया गया है। यह बात मंत्री प्रताप सरनाईक ने कही है।
इस निर्णय के अनुसार 5 क्षेत्रीय प्रभाग बनाए गए हैं – मुंबई, नासिक, नागपुर, पुणे और अमरावती, तथा प्रत्येक क्षेत्रीय प्रभाग के अंतर्गत कार्य विभाग और मुख्यालय निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक समिति के लिए आवश्यक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, तथा उस क्षेत्र के यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और समय पर सेवाएँ प्राप्त हों, इसके लिए सभी प्रकार की योजनाएँ क्रियान्वित की जाएँगी। उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. माधव कुसेकर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल उचित क्रियान्वयन शुरू करने के निर्देश दिए हैं।


