
देश का पहला ई-ट्रैक्टर ठाणे में हुआ पंजीकृत
ठाणे ( युनिस खान ) परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल और पैसे बचाने वाला ई-ट्रैक्टर कृषि क्षेत्र में क्रांति लाएगा। वे ठाणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में देश के पहले ई-ट्रैक्टर का पंजीकरण करते हुए बोल रहे थे। इस अवसर पर ठाणे क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी हेमांगिनी पाटिल, ई-ट्रैक्टर बनाने वाली एटोनेक्स कंपनी के सीईओ कौस्तुभ धोंडे और सेल्स मैनेजर अभिषेक शिंदे मौजूद थे।
मंत्री सरनाईक ने कहा कि सरकार की नीति है कि 2030 तक सड़क पर कुल वाहनों की संख्या का 20 से 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक होना चाहिए। इसके अनुसार सरकार ने ई-वाहनों की खरीद पर टोल माफी और प्रत्यक्ष सब्सिडी देने की योजना बनाई है। इससे ई-ट्रैक्टर खरीदने वाले किसानों को लाभ होगा। साथ ही, स्वर्गीय अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम के माध्यम से उन्हें ई-ट्रैक्टर खरीदने के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके साथ ही, ई-ट्रैक्टर की रखरखाव और मरम्मत की लागत अन्य डीजल ट्रैक्टरों की तुलना में लगभग शून्य है। साथ ही, उपयोग के दौरान खपत होने वाली बिजली की लागत डीजल ईंधन की तुलना में 60 से 70 प्रतिशत कम हो जाएगी। इसलिए, ई-ट्रैक्टर भविष्य में किसानों की “कीमिया” बन जाएंगे।
अक्षय प्रौद्योगिकी पर आधारित कंपनी ऑटोनेक्स्ट ने भारत का पहला स्वदेशी रूप से निर्मित ई-ट्रैक्टर बाजार में सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। आज, इस ट्रैक्टर का पहला आधिकारिक वाहन पंजीकरण समारोह ठाणे में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में आयोजित किया गया था।महाराष्ट्र राज्य इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 के तहत ऑटोनेक्स्ट कंपनी को ई-ट्रैक्टर की खरीद पर 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। ई-ट्रैक्टर का उपयोग मुख्य रूप से कृषि कार्य के लिए किया जाएगा। 1 एकड़ की जुताई के लिए ई-ट्रैक्टर की लागत मात्र 300 रुपये है। वहीं डीजल ट्रैक्टर की लागत 1200 से 1500 रुपये है। इसलिए रखरखाव लागत में बचत के साथ-साथ ई-ट्रैक्टर किसानों को दैनिक उपयोग में काफी पैसे बचा सकता है।


