
ठाणे ( यूनिस खान ) सार्वजनिक जीवन में, किसी पद को संभालने पर मानदेय और विभिन्न वित्तीय लाभ लेना आम बात मानी जाती है। वहीं जिजाऊ एजुकेशनल एंड सोशल ऑर्गनाइज़ेशन के अध्यक्ष, शिवसेना के उप-नेता और ठाणे-पालघर डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के नवनिर्वाचित डायरेक्टर नीलेश सांबारे ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वे डायरेक्टर पद से जुड़े मानदेय, मीटिंग अलाउंस, यात्रा भत्ते या किसी अन्य वित्तीय लाभ को स्वीकार नहीं करेंगे। उसे बैंक कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए देने का पत्र बैंक को दिया है।
इस संबंध में, उन्होंने बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को एक औपचारिक लिखित अनुरोध सौंपा है। इसमें उन्होंने कहा है कि डायरेक्टर के तौर पर उन्हें मिलने वाली पूरी रकम का इस्तेमाल बैंक के कर्मचारियों और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए किया जाए। उनके इस फैसले का सहकारी और सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ ठाणे और पालघर जिलों की आम जनता द्वारा भी व्यापक रूप से स्वागत और सराहना की जा रहा है। अपने पत्र में नीलेश सांबरे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि डायरेक्टर का पद जनता के भरोसे का प्रतीक है। यह भूमिका व्यक्तिगत वित्तीय लाभ के लिए नहीं है, बल्कि आम लोगों के कल्याण और संस्थान के विकास के लिए काम करने की एक जिम्मेदारी है।
इस दृढ़ विश्वास के साथ कि शिक्षा सामाजिक बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है, उन्होंने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि कर्मचारियों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके, उनके सपनों को साकार किया जा सके और आर्थिक तंगी को उनकी प्रगति में बाधा न बनने दिया जाए। उन्होंने कहा कि इससे बड़ी संतुष्टि और क्या हो सकती है कि डायरेक्टर के तौर पर उन्हें मिलने वाली रकम किसी छात्र की शिक्षा में मदद करे। गौरतलब है कि नीलेश सांबरे ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, कृषि, जरूरतमंद छात्रों को आर्थिक सहायता, मुफ्त अस्पताल, मुफ्त सीबीएससी स्कूल, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन, एम्बुलेंस सेवा और अन्य सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज सेवा में वर्षों समर्पित किए हैं। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सेवा की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखते हुए यह निर्णय लिया है।


