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बाघ संरक्षण, पर्यटन व वन संरक्षण के लिए पांच सूत्रीय कार्यक्रम लागू – देवेंद्र फडनवीस 

महाराष्ट्र में 300 करोड़ वृक्षारोपण का संकल्प – वन मंत्री गणेश नाईक
नवी मुंबई ( यूनिस खान ) प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से राज्य में बाघ संरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा मूल्य-आधारित बाघ संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसके लिए मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना, हरित आजीविका अभियान, सीएसआर के माध्यम से बाघ संरक्षण, सतत पर्यटन तथा वन संरक्षण के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना जैसी पांच सूत्रीय कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। यह जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी।
         वहीं वन मंत्री गणेश नाईक ने बताया कि राज्य ने 300 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है तथा बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराने के लिए राज्य में पांच टिश्यू कल्चर प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा नागपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, वन मंत्री गणेश नाईक, स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर, वित्त एवं नियोजन राज्य मंत्री एड. आशीष जयस्वाल, मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रवीण परदेशी, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास राव तथा कंबोडिया, भूटान और बांग्लादेश के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
          मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि बाघ प्राकृतिक आवास और खाद्य श्रृंखला का केंद्रबिंदु है तथा उसके संरक्षण से पर्यावरण और वनों की रक्षा होती है। राज्य के छह बाघ अभयारण्यों के कोर क्षेत्रों से गांवों का पुनर्वास कर नए बफर क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग की नई नीति के कारण स्थानीय नागरिक पुनर्वास और स्थानांतरण के लिए आगे आए हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए नियोजित उपाय किए जा रहे हैं तथा बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में वन विभाग का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है और बाघ संरक्षण के साथ-साथ अनेक नवाचारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने 300 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा है तथा बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने के लिए राज्य में पांच टिश्यू कल्चर प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है तथा पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और जैव विविधता को मजबूत करने के लिए आधुनिक पहलें लागू की जा रही हैं।
        राज्य में बाघों की संख्या 190 से बढ़कर 444 हुई
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    मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में राज्य में बाघों की संख्या 190 थी, जो बढ़कर 444 हो गई है, और विश्वास व्यक्त किया कि आगामी बाघ गणना में यह संख्या 600 से अधिक होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत बाघ भारत में हैं और भारत में बाघों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। पिछले दो दशकों में लगातार किए गए संरक्षण प्रयासों के कारण महाराष्ट्र अब पहले स्थान की ओर बढ़ रहा है। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे सम्मेलन बाघ अभयारण्यों में पर्यटन को बढ़ावा देंगे और रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगे।

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