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ओबीसी की ताकत दिखने के लिए मंडल आयोग की दूसरी लड़ाई शुरू होगी – डा जितेन्द्र आव्हाड 

ठाणे [ युनिस खान ] देश में बाघ, शेर, बकरी, कुत्ते और बिल्ली की गणना की जाती है लेकिन ओबीसी को मानव बाघ के रूप में नहीं गिना जाता है। इस आशय का उदगार व्यक्त करते हुए राज्य के गृहनिर्माण मंत्री डा जितेन्द्र आव्हाड ने कहा कि शिवराय की सेना में सबसे ज्यादा ओबीसी थे। उन्होंने आगे कहा कि ओबीसी की यह लड़ाई अब शांत रहकर देखने का समय नहीं है।अब समय शांत रहने का नहीं है मेरा जीवन सिर्फ इसलिए बर्बाद किया जा रहा है क्योंकि शिक्षा में आरक्षण खत्म हो रहा है;  इसलिए अब हमें मंडल आयोग की दूसरी लड़ाई शुरू करनी है।
             राकांपा द्वारा ठाणे में राज्य स्तरीय ओबीसी सम्मेलन का आयोजन किया। इस अवसर पर वरिष्ठ विचारक प्रा.  हरि नरके, राकांपा ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर बालबुधे, राकांपा ठाणे शहर अध्यक्ष आनंद परांजपे, ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव राज राजापुरकर, शहर अध्यक्ष गजानन चौधरी आदि उपस्थित थे। डा आव्हाड ने अपने कंधे पर एक कंबल और हाथ में एक छड़ी लेकर चकी ढोल बजाते हुए मंच पर प्रवेश किया।उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मंडल आयोग ने आपके बीच के व्यक्ति को महापौर बनाया है। मंडल आयोग की वजह से ही सोलापुर में कलाल समाज के पहले महापौर बनने क अवसर मिला !  कलाल समुदाय के बारे में कितने लोग जानते हैं, कलाल शराब बेचने वाला समुदाय है।  उत्तर प्रदेश और बिहार में पिछड़े और अति पिछड़ा वर्ग हैं।  वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं।  हालांकि, महाराष्ट्र में जाति की कोई मान्यता नहीं है यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आपको इसके लिए आवाज उठाना पड़ेगा और अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ेगा। चिल्लाना होगा;  हम अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं, शांत नहीं बैठते।  हमें भी कड़ा संघर्ष करना होगा। आरक्षण गरीबी मिटाने का कार्यक्रम नहीं है।  शोषित और वंचितों को मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण दिया जाता है। यह बात शोषित लोगों को मिले आरक्षण डा बाबासाहेब अम्बेडकर और महात्मा जोतिराव फुले ने कहा है।  लेकिन ओबीसी की जनगणना क्यों नहीं हो रही है?  ऐसा सवाल उन्होंने किया।
महाराष्ट्र में ओबीसी में 354 जातियां हैं ,मैं खुद ओबीसी हूं।  लेकिन, मैंने कभी ओबीसी की राजनीति नहीं की।  लेकिन मुझे अपने भाइयों के लिए लड़ना है।  महाराष्ट्र में ज्यादातर लोग जिनके सिर पर छत नहीं है, वे आदिवासी और खानाबदोश हैं।  लेकिन कुछ लोगों को यह कहते हुए शर्म आती है कि वे पिछड़े हैं। शहरीकरण के बावजूद 100 में से केवल 8 ओबीसी बच्चे ही स्नातक कर रहे हैं।  ओबीसी के बीच ड्रॉपआउट दर में वृद्धि हुई है।  ऐसे में ओबीसी को शैक्षिक आरक्षण की जरूरत है।  हालांकि सरकारी नौकरियों में आरक्षण है, जहां सरकारी नौकरियां हैं, सरकारी स्वामित्व वाले उद्योग बेचे जा रहे हैं। जिन संगठनों ने संविधान का विरोध किया है वे लोग आपके आरक्षण का समर्थन कैसे करेंगे?  ओबीसी समुदाय के आगे बढ़ने पर कुछ लोगों की आँखों में दर्द होता है। गृहिणी का बेटा इंजीनियर बनता है अपने घर में बर्तन साफ़ करने वाली महिला का बेटा अगर पढ़ाई के लिए विदेश जा रहा है तो कुछ लोगों के पेट में दर्द होगा। इसलिए ये लोग ओबीसी आरक्षण के खिलाफ हैं। ओबीसी अपनी ताकत को नहीं समझते हैं।  इसलिए आरक्षण विरोधी आपको हल्के में लेते हैं।  इसके लिए ओबीसी को एकजुट होना चाहिए।  इस देश की राजनीति उंगलियों पर नाचनी चाहिए।  अगर उत्तर प्रदेश-बिहार में ओबीसी अपना मुख्यमंत्री तय करते हैं, तो महाराष्ट्र में ओबीसी को भी अपनी ताकत पहचाननी चाहिए।
गृहनिर्माण मंत्री आव्हाड ने घोषणा करते हुए कि वह कमाठीपुरा का विकास करेंगे।  आव्हाड ने इस बार किया।  हम आने वाले महीनों में कमाठीपुरा का विकास करेंगे।  कमाठीपुरा ऐतिहासिक है।  लोग काम के लिए मुंबई आए और उन्होंने इस क्षेत्र में काम करना बंद कर दिया।  उनकी वजह से सात द्वीपों का मुंबई एक हो गया।  इसलिए इस क्षेत्र को कमाठीपुरा कहा जाता है। आज आरक्षण खत्म होने से उनके बच्चों की पढ़ाई में दिक्कत होगी।  ये लोग आज भी दस बाय दस घरों में रहते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि गरीबी क्या होती है।  इसलिए मैं गरीबों के लिए काम करने जा रहा हूं।  उन्होंने यह भी कहा कि भगवान मुझे यह नेक काम करने दें।

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