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विधानसभा में राज्य सरकार की कपड़ा उद्योग नीति का विधायक रईस शेख ने किया पोस्ट-मार्टम 

मुंबई [ अमन न्यूज नेटवर्क ] राज्य के भिवंडी, मालेगांव, सोलापुर और इचलकरंजी में कपड़ा उद्योग बंद होने की कगार पर है। राज्य सरकार द्वारा लायी गयी कपड़ा उद्योग नीति यहां के कपड़ा उद्योग को बचाने के बजाय यहां के बुनकरों को बर्बाद कर रही है। समाजवादी पार्टी के भिवंडी पूर्व विधायक रईस शेख ने पावरलूम उद्योग पर आए गंभीर संकट की हकीकत विधानसभा में कड़े शब्दों में रखी। रईस शेख़ ने कहा कि अगर समय रहते इस नीति में सुधार नहीं किया गया तो महाराष्ट्र के छोटे वावरलूम मालिकों और उद्यमियों को सूरत और गुजरात के सामने झुकना पड़ेगा।

शिंदे फड़नवीस सरकार ने राज्य में कपड़ा उद्योग के भविष्य के लिए पांच साल की कपड़ा नीति की घोषणा की है। लेकिन इसमें कई खामियां हैं जिसकी बीजेपी समर्थक कपड़ा उद्योग के लोगों ने भी आलोचना भी की है। इसलिए सरकार को इनमें से कई प्रावधानों में बदलाव करना पड़ा। कपड़ा उद्योग नीति से बिजली सब्सिडी खत्म करने, बिजली वितरण का निजीकरण कर छोटे पावरलूम उद्योग पर प्रतिबंध लगाने की नीति अपनाने, केंद्र सरकार द्वारा वस्तु एवं बिक्री कर में सुधार करने से गुजरात राज्य को ही फायदा होगा। ऐसे कई मुद्दे विधायक रईस शेख ने महाराष्ट्र विधानसभा में उठाए। उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि यदि राज्य सरकार ने समय रहते राज्य में कपड़ा उद्योग पर ध्यान नहीं दिया, तो भिवंडी, मालेगांव, सोलापुर और इचलकरंजी शहरों में बुनकर यानी कपड़ा उद्योग पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगा।

इस मौके पर भिवंडी पूर्व से समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने कहा, ”1857 के ऐतिहासिक विद्रोह के दौरान रेशम के रूमाल बनाने वाले उत्तर प्रदेश के बुनकर समुदाय ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई छेड़ी थी। वह गले में रेशमी रुमाल लपेटकर एक क्रांतिकारी के रूप में अपनी पहचान जाहिर करते थे। ऐसे कई बुनकरों को अंग्रेजों ने पेड़ों से लटकाकर फांसी दे दी थी। अंग्रेज़ों के ज़ुल्म से बचकर उत्तर भारत का बुनकर समाज महाराष्ट्र आया, जहां पहले मालेगांव, भिवंडी और बाद में मदनपुरा में अपने कारोबार के साथ रहने लगा। उन्होंने यहां की मिट्टी को अपनी कर्मभूमि और मातृभूमि के रूप में स्वीकार किया। बाद में इस समुदाय ने महाराष्ट्र में कपड़ा उद्योग और पावरलूम व्यवसाय का विस्तार किया। कपड़ा उद्योग कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार पैदा करने वाला उद्योग बन गया। दुर्भाग्य से किसी भी सरकार ने इस बात पर ठीक से ध्यान नहीं दिया। इसके लिए कोई नीति नहीं लाई गई, इसलिए अब बुनकरों के भूखे मरने की नौबत आ गई है।”

इस समय कपड़ा उद्योग मालेगांव, भिवंडी, इचलकरंजी और सोलापुर में केंद्रित है,  लेकिन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदीजी अमरावती में एक एकीकृत कपड़ा पार्क बना रहे हैं। नई नीति के जरिए बुनकरों और पावरलूम उद्योग को मिलने वाली सब्सिडी और अनुदान को वापस लेने की कोशिश की जा रही है। जब कपड़ा उद्योग पूरी तरह से बिजली से चलने वाला उद्योग है, अगर सरकार बिजली सब्सिडी वापस ले लेती है, तो यह व्यवसाय कैसे बचेगा? ऐसी आशंका विधायक शेख ने व्यक्त की। भिवंडी स्थित निजी बिजली वितरण कंपनी टोरेंट पावर छोटे पैमाने के पावरलूम उद्योगों को बंद कर रही है। बिजली की खपत 27 एचपी होने पर ही सब्सिडी मिलती है। यहां तक कि अगर कोई छोटा पावरलूम उद्योग इस सीमा से एक एचपी यूनिट भी ज़्यादा का उपयोग करता है, तो टोरेंट कंपनी उद्योग को अवरुद्ध करने के लिए दौड़ पड़ती है। रईस शेख ने मांग की कि सरकार को राज्य में कपड़ा उद्योग को बचाने के लिए समय पर कदम उठाना चाहिए।

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