
ठाणे ( युनिस खान ) सिग्नल और फुटपाथ पर जीवन यापन करने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़ने सिग्नल स्कूल यात्रा तीनहाथ नाका ब्रिज के नीचे से शुरू होकर आज ऐरोली ब्रिज के नीचे पहुंची है। फर्क सिर्फ इतना है कि कल तक वे तीनहाथ नाका ब्रिज के नीचे शरणार्थी और बेघर लोगों की तरह रह रहे थे। आज वह ऐरोली ब्रिज के नीचे एक उद्यमी के रूप में काम कर रहे हैं। यह सब समाजसेवी भटू सावंत के विचारों और उनकी योजना से हुआ है। अंग्रेजी और आधुनिक शिक्षा संस्थान चलाने के लिए तो बहुत सारे लोग आते हैं लेकिन भटू सावंत ने मजदूरी कर और भींख मांगकर गुजारा करने वाले गरीबों एवं बेसहारा लोगों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है।
यह देश में पहला उदाहरण है जब किसी उद्यमी ने सिग्नल स्कूल में पढ़ाई करने के बाद अपनी कंपनी पंजीकृत कराई है। समर्थ भारत व्यासपीठ के संस्थापक मुकुंद गोरे ने संदेश दिया है कि हाथ काम देने वाले हाथ होने चाहिए, काम करने वाले हाथ नहीं। समर्थ भारत व्यासपीठ आज उसी रास्ते पर काम कर रही है। जीवन में विपरीत परिस्थितियों की बाधाओं को दरकिनार करते हुए सिग्नल स्कूल के बच्चे अब सुरक्षा अवरोध बना रहे हैं। एसएमसी जैसे मान्यता प्राप्त उद्योग समूह ने इन बच्चों पर बहुत भरोसा दिखाया है और एक अलग मॉडल प्रस्तावित किया है।
समर्थ भारत व्यासपीठ के माध्यम से भटू सावंत से टीएमसी के सहयोग से सिग्नल और फुटपाथ पर रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए ठाणे के तीनहाथ नाका ब्रिज के नीचे सिग्नल स्कूल शुरू किया। जिसमें अनेक गरीब बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सफल जीवन की यात्रा शुरू किया जिनके माता पिता कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनके बच्चे भी शिक्षा ग्रहण कर कभी कामयाबी हासिल करेंगे। यह सब समर्थ भारत व्यासपीठ के सिग्नल स्कूल से संभव हुआ है। ठाणे मनपा आयुक्य रहते संजीव जयसवाल ने सिग्नल स्कूल से अच्छे अंकों से परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों का सत्कार करते हुए सहयोग किया था। आज ठाणे के सिग्नल स्कूल से शिक्षा ग्रहण कर कई बच्चे समाज में उदाहरण पेश कर रहे हैं।


