
ठाणे ( युनिस खान ) ठाणे मनपा का अतिक्रमण विभाग किश्त वसूली का एक शक्तिशाली तंत्र है। विधायक डॉ जितेंद्र अव्हाड ने इस आशय का आरोप लगाते हुए सत्ताधारी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने यह भी खुलासा किया है कि अगर आप अतिक्रमण विभाग में स्थानांतरण कराना चाहते हैं तो आपको 5 करोड़ रुपये देने होंगे। उन्होंने कहा कि ठाणे मनपा के शासकों की भी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनके पास अपना डंपिंग ग्राउंड नहीं है, कोई बांध नहीं है, कोई सीवेज सिस्टम नहीं है, क्लस्टर योजना आगे नहीं बढ़ी है। नेतृत्व ऐसे लोगों द्वारा किया जाता है जिनके पास विकास के लिए कोई दूरदृष्टि नहीं है।
सोमवार को विधायक डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने सार्वजनिक मंच पर आकर ठाणे मनपा और उसके शासकों की कड़ी आलोचना की है। जिला अध्यक्ष सुहास देसाई, पूर्व विरोधी पक्ष नेता अशरफ पठान शानू और कार्यकारी अध्यक्ष प्रकाश पाटिल की अवधारणा के आधार पर जन सुनवाई योजना क्रियान्वित किया गया।
डॉ आव्हाड ने कहा कि ठाणे के नागरिक काफी परेशान हैं और मनपा तथा कुछ लोग मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। जबकि मानपाड़ा क्षेत्र के 80 लोग क्लस्टर का विरोध कर रहे हैं, क्लस्टर योजना को इन नागरिकों पर जबरन थोपा जा रहा है। जिनके पास बड़े घर हैं वे क्लस्टर योजना में क्यों शामिल होंगे? अब तक कितनी क्लस्टर योजनाएं सफल रही हैं? इस समय डॉ आव्हाड ने ऐसे प्रश्न उठाए। किसी डेवलपर को सात एकड़ जमीन देकर उसे विकसित करने के लिए कहा जाना चाहिए। डेवलपर किस प्रकार का विकास करेगा? ठाणे में सभी एसआरए योजनाएं बंद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआरए योजना को जबरदस्ती क्लस्टर में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
पिछले 45 वर्षों में ठाणे के लोगों के लिए कोई बांध नहीं बनाया जा सका। मैं स्वयं ही योजना लाया था। वे ऐसा क्यों नहीं कर सके? आव्हाड ने सवाल उठाया, “अगर 2,000 करोड़ रुपये की सड़कें बनाई जा रही हैं, तो जलाशय क्यों नहीं बनाया जा सकता ?” ठाणे निवासियों के लिए पानी नहीं है, ओसी देते समय डेवलपर को कहा जाता है कि नागरिकों को पानी उपलब्ध कराना आपकी जिम्मेदारी है, इसलिए यदि डेवलपर पानी उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है, तो उसे ओसी क्यों दिया जाता है? डॉ आव्हाड ने जनता दरबार के माध्यम से यह भी मांग की कि अब से सभी नए निर्माणों को ओसी देने पर रोक लगाई जाए। हर गली कूड़े से अटी पड़ी है, पानी नहीं है, पूरे शहर की नालियों की सफाई नहीं होती, हर तालाब में सीवेज बहाया जाता है, तो सीवेज निपटान का पैसा कहां गया? डॉ आव्हाड ने आलोचना करते हुए कहा कि पिछले 45 वर्षों में पानी और सीवरेज की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है, तथा हमारी नगरपालिका को एक धनी नगरपालिका के रूप में चित्रित किया जाता है।
इस समय पूर्व नगरसेवक राजेश खारकर, अरविंद मोरे, राजेश कदम, महासचिव राजेश जे साटम, रचना वैद्य, राजू चपले, राजू शिंदे, शिवा कालू सिंह, एकनाथ जाधव, राहुल भालेराव, समाधान साल्वे, माधुरी सोनार, पूजा उदासी, मेहरबानो पटेल, मल्लिका पिल्ले, रिंकू सिंह, कैलाश सुरकर, विशांत गायकवाड़, महेश भाग्यवंत, सुनील कुरहाड़े, इकबाल शेख, गणेश मुंडे, राहुल पाटिल, जयेश पाटिल, सुरेश सिंह, रत्नेश दुबे सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
ठाणे में भूमि हड़पने के मामले बढ़े
ठाणे में भूमि हड़पने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं, और एक पिछड़े वर्ग की महिला के पक्ष में न्यायालय के फैसले के बावजूद, अहमद पठान नामक एक व्यक्ति ने जबरन उसकी भूमि पर कब्जा कर लिया है। डॉ आव्हाड ने चेतावनी देते हुए कहा कि पुलिस व्यवस्था उन्हें न्याय नहीं दे रही है, और अगर जनता दरबार में आई महिला को न्याय नहीं मिला तो हम अपने तरीके से नियंत्रण करेंगे।


