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पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे 

इस हमले के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार – डॉ. जितेंद्र आव्हाड

ठाणे ( युनिस खान ) पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में आज राकांपा शरद पवार पार्टी के नेता डॉ. जितेंद्र आव्हाड के नेतृत्व में तथा सैयद अली (भाई साहब) की उपस्थिति में मुंब्रा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर विरोध आंदोलन किया गया। काले झंडे दिखाते पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए हजारों मुंब्रा निवासी आतंकवादी कृत्य की निंदा करने के लिए सड़कों पर उतर आए।

कश्मीर के पहलगाम जिले में आतंकवादी हमले में करीब 28 लोग मारे गए हैं। एनसीपी-शरद चंद्र पवार पार्टी के कलवा-मुंब्रा विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष शमीम खान और अशरफ शानू पठान की अपील पर हजारों मुंब्रा निवासी हमले की निंदा करने के लिए सड़कों पर उतर आए और अपनी तीव्र भावनाएं व्यक्त कीं। शुक्रवार की नमाज के बाद हजारों लोग कौसा जामा मस्जिद के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शन के बाद उन्होंने रिजवी बाग मस्जिद, एनसीपी-शरद चंद्र पवार पार्टी कार्यालय और तनवीर नगर में आंदोलन किया। इस अवसर पर शमीम खान ने सड़क जाम कर दिया। नागरिकों ने रशीद कम्पाउंड में भी पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद, आतंकवाद को जड़ से मिटाओ, हमारी जान… हिंदुस्तान जैसे नारे लगाए।

इस अवसर पर डॉ. जितेन्द्र आव्हाड ने कहा कि पहलगाम में हुई हत्याओं के लिए आतंकवादी जिम्मेदार हैं और केन्द्र सरकार भी समान रूप से जिम्मेदार है। चरमपंथियों की हिटलिस्ट में शामिल इस परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर क्यों थी? डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने पूछा कि पहलगाम हमले में शहीद हुए जवानों की शवयात्रा देखकर देश के हर घर में आंसू आ गए थे। इसीलिए मुंब्रा-कौसा में मुस्लिम भाइयों ने नमाज अदा करने के बाद हर चेकपोस्ट पर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह आंदोलन मानवता का प्रतीक है। 28 लोगों की मौत के लिए आतंकवादी जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, ये सरकारें भी जिम्मेदार हैं। इस माहौल में एक भी सुरक्षा गार्ड नहीं था; क्या इसका मतलब यह है कि निर्दोष नागरिकों को खुले में मरने के लिए छोड़ दिया गया? पाकिस्तान से खतरे के बावजूद सैनिकों को तैनात नहीं किया। सैनिकों की संख्या में दो मिलियन की कमी की गई है। दूसरे शब्दों में, सेना में भर्ती नहीं की जाती है। ऐसा लगता है जैसे भारत ने चीन और पाकिस्तान के साथ शांति समझौते किए हैं। लेकिन, इस सरकार की नीति सवाल न पूछने की है। अब यह स्वीकार किया गया है कि व्यवस्था खराब थी। इसका क्या मतलब है? क्या आपने आतंकवादियों के लिए दरवाजे खुले नहीं छोड़े? इसलिए, गलती के लिए कोई माफी नहीं है।
खान ने कहा, “भारतीय नागरिक इन कृत्यों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को कभी माफ नहीं करेंगे।” यह घटना प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की लापरवाही के कारण हुई है। जिन आतंकवादियों ने हमारे भाइयों को गोली मारी है। उन्होंने मांग की कि उन्हें भी सड़क पर गोली मार दी जाए।

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