
ठाणे ( युनिस खान ) राबोडी निवासी कार्यकर्ता जमील शेख की हत्या के मामले में गिरफ्तार हत्यारे द्वारा सार्वजनिक रूप से नाम बताने के बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। और तो और, पुलिस अदालत के आदेश के बाद भी मुख्य मास्टरमाइंड को गिरफ्तार नहीं कर रही है। विधायक डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने आरोप लगाया कि यह पुलिस द्वारा कानून की हत्या करने के समान है।
कुछ वर्ष पहले राबोडी के मनसे कार्यकर्ता जमील शेख की हत्या कर दी गई थी। डॉ. जितेंद्र आव्हाड आज जमील शेख के घर उनकी बेटी को 10 वीं की परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक लाने पर बधाई देने गए थे। उन्होंने इस अवसर पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए ये आरोप लगाए। डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने बताया कि जमील की दोनों बेटियां बेहद बुद्धिमान हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि पैसे की कमी के कारण उसकी शिक्षा बाधित न हो, सुहास देसाई और मैंने अपनी बेटी, जो 10 वीं कक्षा पास कर चुकी है, उसकी आगे की शिक्षा का खर्च उठाने का निर्णय लिया है।
जब उनसे पूछा गया कि मुख्य आरोपी नजीब मुल्ला की गिरफ्तारी नहीं हुई है तो उन्होंने कहा कि हमें पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है। जब नाम एफआईआर में होता है तो उसे आरोपपत्र से हटा दिया जाता है। इस तरह से नाम गायब करना गैरकानूनी है। इसलिए पुलिस जांच पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। हत्यारों द्वारा सुपारी देने वाले का नाम बताने के बाद भी पुलिस द्वारा सरगना को गिरफ्तार न करना, जांच अधिकारियों और अपराधियों के बीच मिलीभगत का संकेत है। डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने यह भी कहा कि मोबाइल टावर लोकेशन की जांच के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि अधिकारी और आरोपी एक दूसरे से मिले हुए थे।


