
ठाणे ( यूनिस खान ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों का भाजपा जश्न मना रही है। कार्यकर्ताओं में भी उत्साह है। अपनी स्थापना और दो सांसदों वाली भाजपा आज केंद्र के साथ ही अधिकांश राज्यों में सत्ता है। देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा में कहाँ है वो लोग जिन्होंने सत्ता के शिखर तक पहुंचाने में अपना जा8वन लगा दिया। भाजपा की स्थापना के सदस्य और राष्ट्रीय परिषद के दो बार सदस्य रहे वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश शर्मा की बात कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर और रामजन्मभूमि आंदोलन की बात करे तो ओमप्रकाश शर्मा के कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता। राममंदिर आंदोलन के ओमप्रकाश शर्मा कारसेवकों का जत्था लेकर मुंबई से अयोध्या के लिए रवाना हुए। 7से समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार होने के चलते कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था थी। इसके बावजूद पहली बार 1990 में कार सेवा के लिए अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ जाने के दौरान झांसी रेलवे स्टेशन पर उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वे अपने 36 साथियों के साथ 22 दिनों तक जालौन जिले की रामपुरा में बनी अस्थाई जेल में रहे। शर्मा ने बताया की 1990 की करसेवा में मेरे साथ विश्वनाथ पाटील , डा सुधाकर पाटील व अन्य विक्रमगढ़ के वनवासी क्षेत्र से कारसेवक शामिल थे। 22 दिन जेल रखने के बाद से रोडवेज की 35 बस से मध्य प्रदेश के मोहना में छोड़ा।
दूसरी बार 5 दिसंबर 1992 की रात फैजाबाद पहुंचे। सुबह फैजाबाद से 13 किमी पैदल चलकर अयोध्या पहुंचे। वहां बताया गया कि कई दिनों से करीब 10 लाख लोग अयोध्या राम जन्मभूमि की कार सेवा के लिए पहुंचे हैं। उस समय उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। शर्मा और उनके साथियों को विद्युत् विभाग के कार्यालय में रुकाया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के गाँव से 23 कार सेवक अयोध्या आये थे। शर्मा ने कहा कि वर्ष 1528 से 2020 तक 492 वर्षों तक चले विवाद 5 अगस्त 2020 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद राममंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इससे देशवासियों में ख़ुशी का माहौल है। अब अयोध्या में नागरिकों को भव्य मंदिर में भगवान श्रीराम के दर्शन का अवसर मिल गया है। शर्मा ने बताया कि जिन्होंने 1988 से 1992 तक राम जन्मभूमि आंदोलन और कारसेवा में शामिल रहे उनमें से अधिकांश आज जीवित नहीं है ।आज हम उन्हें भी याद कर रहे हैं ।
सत्याग्रह आंदोलन में अपनी भागीदारी के बारे में बताते हुए शर्मा ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के अधिकारों और सम्मान को सुरक्षित करने के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1952 में श्रीनगर में आंदोलन शुरू किया। कश्मीर का मुद्दा भारतीय जनसंघ के एजेंडे में था। भाजपा की स्थापना के बाद उसने अपने पांच प्रमुख मुद्दों में कश्मीर को अपने एजेंडे में रखा। हमारा नारा था , जहां शहीद हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है। कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद पूरे देश में आंदोलन शुरु हुआ। महाराष्ट्र की ओर से 1987 में हुए डोंडा बचाओ आंदोलन का ठाणे जिले का नेतृत्व करने वाले शर्मा ने बताया कि हमें एयरपोर्ट गिरफ्तार का पाकिस्तान से 7 किमी दूरी पर बनी जेल में बंद कर दिया। तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष चमनलाल गुप्ता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तो 3 दिन बाद हमें पुलिस ने रिहा किया। चमनलाल गुप्ता ने कहा कि हम कश्मीरी खुद को अकेला समझ रहे थे आज आप सबके साथ आने हमें लगा कि हम हिंदुस्तान में ही हैं। पलायन कर रहे कश्मीरी पंडितों के लिए आरएसएस ने व्यवस्था किया था जहां से वे अपने करीबियों के साथ जा रहे थे जिसमें अधिक संख्या दिल्ली जाने वालों की थी। आज भी करीब दो लाख कश्मीरी पंडित विस्थापित जीवन जीने के लिए मजबूर है।
शर्मा ने कहा कि कश्मीर को भारत में पूरी तरह से एकीकृत करने की मांग के साथ प्रतिरोध के बीज बोए गए थे। शर्मा ने कहा कि मुखर्जी का प्रतिष्ठित नारा “एकजुट भारत के लिए साझा एजेंडा” आज भी राष्ट्रवादी हलकों में गूंजता है। उन्होंने कहा, “हजारों कश्मीरी पंडितों को भगा दिया गया, उनके घर जला दिए गए और दशकों से उनका जीवन उजड़ गया।” 1988 की एक बड़ी घटना को याद करते हुए शर्मा ने कहा कि वह ‘डोडा बचाओ, कश्मीरी पंडित बचाओ’ के बैनर तले गोपीनाथ मुंडे के नेतृत्व में महाराष्ट्र से आए एक विशेष प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।


