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रीडेवलपमेंट में धोखा देने वाले बिल्डरों पर एमपीआईडी लागू करने की मांग

विधायक संजय केलकर ने मुख्यमंत्री को दिया प्रस्ताव

ठाणे ( यूनिस खान ) ठाणे विधायक संजय केलकर ने राज्य के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस से ठाणे, मुंबई और पूरे एमएमआर इलाके में रीडेवलपमेंट के नाम पर हजारों मिडिल क्लास परिवारों और सीनियर सिटिजन की जीवन भर की कमाई लूटने वाले बिल्डरों के खिलाफ एमपीआईडी एक्ट के तहत सीधी कार्रवाई करने की जोरदार मांग की है।

           जैसे इन्वेस्टर्स के साथ फाइनेंशियल धोखाधड़ी करने वाले कंपनी डायरेक्टरों के खिलाफ एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है, ताकि डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा हो सके। वैसे ही जो बिल्डर सोसायटी के घरों को तोड़कर गरीब लोगों से किराया और पैसा ऐंठकर ठगते हैं, उन्हें नॉन-बेलेबल अपराधों के तहत सीधे गिरफ्तार किया जाना चाहिए। विधायक केलकर ने एमपीआईडी एक्ट में तुरंत बदलाव करने के लिए सरकार को एक डिटेल्ड प्रस्ताव दिया है।

       अभी, कई सोसायटी अच्छी नीयत से बिल्डरों के साथ डेवलपमेंट एग्रीमेंट करती हैं। लेकिन, बिल्डर डेवलपमेंट राइट्स लेने के बाद बिल्डिंग्स को गिरा देते हैं, सोसाइटी के एफएसआई का इस्तेमाल अपनी बिक्री के लिए करते हैं और कुछ महीनों बाद मेंबर्स को किराया देना बंद कर देते हैं। इससे सैकड़ों परिवार सड़कों पर आ गए हैं, कई लोगों को घर और पैसे की कमी के कारण समय से पहले मौत का सामना करना पड़ा है। बिल्डर्स इस फ्रॉड को ‘सिविल डिस्प्यूट’ बताकर कानून में कमियां ढूंढ रहे हैं। विधायक केलकर ने इस पर गुस्सा जताया।

        विधायक केलकर ने मुख्यमंत्री को दिए अपने प्रपोज़ल में कहा है कि, “अगर कोई नागरिक किसी बिल्डर को एक करोड़ रुपये का घर देता है, तो यह एक तरह का ‘डिपॉज़िट’ है। इसलिए, अगर बिल्डर किराया नहीं देता है, तो इस क्राइम को एक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन द्वारा किया गया फ्रॉड माना जाना चाहिए। इसलिए, यह मांग की गई है कि एमपीआईडी एक्ट के सेक्शन 2 (ए) और 2 (बी) में बदलाव करके डेवलपर्स, प्रमोटर्स को फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन माना जाए और सोसाइटीज़ द्वारा उन्हें दिया गया पज़ेशन डिपॉजिट माना जाए।

        सबसे ज़रूरी बदलाव का सुझाव देते हुए, विधायक केलकर ने साफ़ किया कि इस कानून में एक सख्त नियम बनाया जाना चाहिए कि आरोपी बिल्डर को तब तक ज़मानत न दी जाए जब तक वह पूरी बकाया रकम (किराया और कॉर्पस) सही अथॉरिटी या पीड़ित सदस्यों को न दे दे। इससे बिल्डर की प्रॉपर्टी तुरंत ज़ब्त की जा सकेगी और सदस्यों को उनका बकाया पैसा मिल सकेगा।

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