
ठाणे ( यूनिस खान ) बिल्डर लॉबी ने इस समय शहर में हंगामा मचा रखा है। अपने फायदे के लिए ठाणे मनपा के अधिकारी भी इस गलत काम में शामिल हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कवेसर में सामने आया है। कवेसर में, भूमि एकर्स के एक प्रोजेक्ट में ज़मीन के एक प्लॉट पर, जो घर कम इनकम ग्रुप के लिए म्हाडा को दिए जाने थे, ज़िला प्रशासन से नो ऑब्जेक्शन लेटर लेकर 20% घर हड़प लिए गए हैं। यह ठाणे शहर का बहुत बड़ा घोटाला है और सरकार को चूना लगाने वाले भूमि एकर्स के डायरेक्टर्स के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए। केस दर्ज करने की मांग करते हुए राकांपा-शरदचंद्र पवार पार्टी के जिला अध्यक्ष मनोज प्रधान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि डेढ़ दिन के गणपति के बाद वे उक्त प्रोजेक्ट और शहरी विकास विभाग में आंदोलन करेंगे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रुप लीडर अभिजीत पवार, वर्किंग प्रेसिडेंट प्रकाश पाटिल, यूथ वर्किंग प्रेसिडेंट राजेश कदम, सचिन पंधारे मौजूद थे। मनोज प्रधान ने कहा कि ठाणे शहर के मौजे कवेसर, ठाणे में डेवलपर भूमि एकर्स द्वारा लेक स्केप नामक प्रोजेक्ट लागू किया जा रहा है। हालांकि, विकास प्रस्ताव के अनुसार सर्वे नंबर 225 के मूल प्लॉट से सड़क गुजरने के कारण यह प्लॉट बंट गया और सर्वे नंबर 225/3 का प्लॉट अलग हो गया। इस टेक्निकल बात का फ़ायदा उठाकर भूमि एकर्स ने 225/3 और सर्वे नंबर 124/1, 124/4 को मिलाकर इन प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन के सारे प्लान ठाणे मनपा के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट से मंज़ूर करवा लिए। शुरू में यह प्रोजेक्ट 6400 स्क्वेयर मीटर के प्लॉट पर बनना था। लेकिन, भूमि एकर्स ने बगल वाले प्लॉट पर कब्ज़ा करके 8114 स्क्वेयर मीटर पर यह प्रोजेक्ट खड़ा कर दिया। लेकिन, सर्वे नंबर 124/1, 124/4A और 225/3 प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन की मंज़ूरी मिलने के बावजूद उन पर कोई कंस्ट्रक्शन नहीं किया गया। 8 नवंबर 2013 के सरकारी फ़ैसले के मुताबिक, अगर किसी रेजिडेंशियल एरिया में 4000 स्क्वेयर मीटर के प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन किया जाता है, तो 20% फ्लैट म्हाडा को देने होते हैं। बदले में सरकार पैसे का मुआवज़ा भी देती है। लेकिन, भूमि एकर्स ने 2023 में मंज़ूर किए गए कुल 8114 स्क्वेयर मीटर एरिया में से 20% घर म्हाडा को प्रपोज़ किए बिना ही बेच दिए हैं। भूमि एकर्स ने गरीबों के लिए रिज़र्व इन घरों को म्हाडा को सौंपे बिना ही पूरा प्लॉट बेच दिया है। ऐसा देखा गया है कि आर्किटेक्ट, मनपा सिटी डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के अधिकारी और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ऑफिस के कुछ अधिकारियों ने इस काम में उसकी मदद की।
नासिक में भी ऐसी ही घटना हुई थी। पूरी जांच के बाद बिल्डर, आर्किटेक्ट, मनपा सिटी डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के अधिकारी और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ऑफिस के कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया गया था। इसीलिए प्रधान ने मांग की है कि इस स्कैम की जांच हो और संबंधित लोगों के खिलाफ एक्शन लिया जाए। इस बीच, उन्होंने इस बारे में मनपा आयुक्त और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को भी लिखा है। इसलिए, एडमिनिस्ट्रेशन को तुरंत एक्शन लेना चाहिए; नहीं तो, प्रधान ने यह भी चेतावनी दी कि हम एक पब्लिक मूवमेंट शुरू करेंगे। जिस भूमि एकर्स ने सरकार को धोखा दिया, उसी ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को दिए जाने वाले 610 सस्ते घरों के लिए भी सरकार को धोखा दिया है। भूमि एकर्स ने उन घरों को बाज़ार भाव पर बेचकर सरकार को धोखा दिया है, जिन्हें सरकार के फ़ैसले के मुताबिक यूएलसी के ज़रिए 911 रुपये प्रति स्क्वेयर फ़ीट पर बेचा जाना था। इस बारे में ठाणे अर्बन कॉम्प्लेक्स के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने नोटिस भी जारी किया है। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मनोज प्रधान ने सवाल उठाया है कि सरकार को बार-बार धोखा देने वाला यह बिल्डर क्या सरकारी दामाद है।


