
ठाणे [ युनिस खान ] देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के पड़ोसी जिले रायगढ़ , ठाणे, पालघर से बुलट ट्रेन, फ्रेट कॉरिडोर, बंदरगाह, मेट्रो रेल की विकास योजनाओं के साथ ही भारतीय रेल कई महत्वपूर्ण रेल योजनाओं पर सरकार को ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है। इससे बड़े शहरों के भार को कम करने, तीसरी और चौथी मुंबई बसाने के साथ ठाणे व पालघर जिले के विकास का मार्ग खुल जायेगा। ठाणे जिला रेल प्रवासी संगठना के अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने कहा है कि हमने डहाणु – नाशिक , डहाणु – कल्याण एवं कल्याण – नगर रेल मार्गो को रेलवे की योजना में समाहित करने की मांग करीब 40 वर्षों से किया है। देश की आजादी के बाद गठित पहली संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के समक्ष जव्हार के राजा ने डहाणु – नाशिक रेल मार्ग की मांग किया था। वर्ष 1998 – 1999 में उक्त रेल मार्ग का सैटलाईट सर्वेक्षण हुआ, प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जव्हार आकर उक्त रेल मार्ग पर काम शुरू कराने का आश्वासन दिया था। रेलमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस रेल मार्ग परियोजना को पुनर्जीवित करने का आदेश दिया लेकिन डहाणु नाशिक रेल मार्ग की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। पालघर के सांसद रहते एड. वनगा ने रेल मंत्री सुरेश प्रभु से डहाणु नाशिक रेल मार्ग को बजट में समाहित करने एवं डहाणु कल्याण रेल मार्ग के सर्वेक्षण शुरू कराने की मांग किया। सांसद डॉ हेमंत विष्णु सावरा दो वर्षों से दहानू – नाशिक रेल मार्ग और क्षेत्र के विकास के लिए प्रयास कर रहे है। मुझे विश्वास है कि वे सफल होंगे।
ठाणे में आने के दौरान ठाणे जिला रेल प्रवासी संगठना के अध्यक्ष एवं भाजपा राष्ट्रीय परिषद् के सदस्य ओमप्रकाश शर्मा ने ठाणे ,पालघर जिले की दशकों प्रस्तावित रेल मार्गो पर सकारात्मक प्रक्रिया शुरू कराने की मांग किया था। डहाणु नाशिक और कल्याण – नगर रेलमार्ग से ठाणे और पालघर जिले का विकास होगा और उपनगरों के साथ ग्रामीण , आदिवासी क्षेत्रों को इसका लाभ मिलेगा। वहीँ कल्याण – नगर वाया मालशेज घाट रेल परियोजना भी प्रस्तावित है लेकिन रेल बजट में उल्लेख आने के बावजूद उक्त मार्गों की योजना पर आगे की कार्यवाही नहीं होने से दोनों जिलों का आदिवासी ग्रामीण इलाका विकास से वंचित है। शर्मा ने कहा है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और आस पास के शहरों की बढती जनसँख्या और नागरिक सुविधाओं के भार को कम करने एवं ग्रामीण आदिवासी इलाकों के विकास के लिए उक्त रेल परियोजनाओं को आगे बढ़ाना अत्यंत जरुरी है। भारत सरकार और रेल मंत्रालय को ठाणे एवं पालघर जिले की प्रतावित योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठोस पहल करना चाहिए तभी एमएमआर का विकास संभव होगा।
मुंबई के बाद नवी मुंबई शहर विकसित किया गया जिसे अटल सेतु से जोड़ने से क्षेत्र के विकास गति मिल रही है और तीसरी मुंबई विकसित होने की रह पर है। पालघर जिले के वाधवन बंदरगाह बनाने की सरकार की योजना शुरू है। सरकार कोस्टल रोड , मोनो, मेट्रो रेल से जोड़कर एमएमआर का विकास कर रही है। राजधानी मुंबई से सटे रायगढ़ जिले का विकास तेजी से हुआ लेकिन ठाणे और पालघर को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के ड्रीम प्रोजेक्ट वाधवन बंदरगाह, और भविष्य के शहर चौथी मुंबई के विकास में दहानू – नाशिक, कल्याण – नगर, तलवाड़ा – कल्याण और वसई – अम्बाड़ी रेलमार्ग को शामिल करने शहरी क्षेत्र और ग्रामीण आदिवासी क्षेत्र के राज्य की प्रगति होगी। यह योजना मुंबई अधिक मजबूत बनाने के साथ देश कीे फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने में सर्वाधिक मददगार साबित होगी


