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खुशियां बांटने वाली उमादेवी ओमप्राश शर्मा की अनुपस्थिति, सैकड़ों परिवारों की दिवाली फीकी

ठाणे ( यूनिस खान ) ठाणे, पालघर संयुक्त जिले के आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और लोगों की समस्याओं के निराकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने एवं भाजपा की राष्ट्रीय परिषद में रहकर उल्लेखनीय कार्य करने वाले ओमप्रकाश शर्मा की उपलब्धियों में उनकी धर्मपत्नी उमादेवी की बड़ी भूमिका रही है। वे जहां सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, गतिविधियों में पूर्ण सहयोग करती रहीं हैं। कहावत है कि हर पुरुष की सफलता में किसी न किसी महिला का हाथ होता है। इसी तरह भाजपा के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश शर्मा को उनकी धर्मपत्नी उमादेवी का सहयोग मिला। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के करीब पहुंचाने में सहयोग रहा। वे अदृश्य शक्ति के रूप उनका साथ दे रही थी। गत दिनों 13 सितंबर 2025 को उनका स्वर्गवास हो गया। आज जब पूरा देश दिवाली का त्यौहार मना रहा है तो उनकी कमी महसूस हो रही है। गरीब आदिवासी परिवारों में दिवाली की खुशियां बांटने अपने करीबी परिवारों तक पहुंचने जो वे माध्यम बनी रहती थी आज उनके न रहने पर कितने परवारों को उनकी कमी खल रही होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
         उनके बारे में कहे तो वे एक महिला संगठक और कार्यकर्ता थी जो महिलाओं तक पहुंच बनाने का न सिर्फ कार्य करती बल्कि एक मार्गदर्शक की भी भूमिका निभाती रही। परिवार को संयुक्त बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ घर परिवार की पूरी जिम्मेदारी लेने के साथ ओमप्रकाश शर्मा को सामाजिक, राजनीतिक कार्यों के लिए पूरा समय दे रही थी। कभी कभी कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शक के रूप हौसला बढ़ाने का भी कार्य कर रही थी। राम जन्मभूमि आंदोलन और कश्मीर बचाओ आंदोलन में जब गोलियां चलती थी उन परिस्थितियों में भी उन्होंने कारसेवा और आंदोलनों में जाने से कभी रोका नहीं बल्कि उत्साह बढ़ाने का कार्य किया। उन्हीं का सहयोग मिला जिसके चलते ओमप्रकाश शर्मा दो बार अयोध्या रामजन्म भूमि आंदोलन में सहभागी बने और जेलों में रहे। समाज के सिर्फ इकलौते व्यक्ति ओमप्रकाश शर्मा हुए जिन्हें रामजन्म भूमि आंदोलन के एक दल का नेतृत्व करने का अवसर मिला।
        राजनीतिक विषय की बात करें तो उन्हीं की सलाह पर पोस्टर, बैनर के सहारे अपना प्रचार प्रसार करने के बदले ठोस कार्य करने मार्ग अपनाया। एड. चिंतामण वनगा और विष्णु सावरा के चुनाव की जिम्मेदारी संभाला और उन्हें लोकसभा विधानसभा चुनाव जिताने में बड़ा योगदान रहा। दोनों आजीवन सासंद, विधायक और मंत्री रहे। आज आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में ओमप्रकाश शर्मा का आदरयुक्त स्थान है। वाडा के स्वामी विवेकानंद कॉलेज में मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले में शहीद जवानों की याद में शहीद स्मारक बनाया। पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी का पहला स्मारक बनाया। वे एक ऐसे नेता थे जो पार्टी और देश की जनता में ही नहीं, विरोधी दलों में भी लोक प्रिय रहे। आज हजारों विद्यार्थियों को दोनों स्मारक से प्रेरणा मिल रही है।

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