
ठाणे ( यूनिस खान ) मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सामाजिक भागीदारी की अपील के बीच, घाड़ीगांवकर ने यह बात रखी कि सरकारी फंड के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन की ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पक्की होनी चाहिए। ठाणे मनपा (शहर विकास, एमएमआरडीए , एमएसआरडीसी सेंट्रल गवर्नमेंट) को मिले सभी तरह के सरकारी फंड और इन फंड से हुए डेवलपमेंट कामों की पूरी जानकारी आम लोगों को देने की मांग के बावजूद, यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासन ट्रांसपेरेंट रवैया नहीं अपना रहा है। इस बारे में राज्य के मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेटरी और ठाणे मनपा आयुक्त को आठ बार ई-मेल और लेटर के ज़रिए बातचीत की गई है। हालांकि, यह सवाल उठाया जा रहा है कि सरकारी निधि से प्राप्त राशि, वास्तविक खर्च और संबंधित कार्यों का विवरण नागरिकों तक लाने में वास्तव में क्या कठिनाई है। यदि सरकारी निधि के विनियोजन में कोई अनियमितता या दुरुपयोग नहीं हुआ है, तो प्रशासन को संबंधित जानकारी का खुलासा करने में कानूनी कठिनाई क्या है? सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि इस मामले में सरकार या मनपा प्रशासन लाभार्थी नहीं है, तो पारदर्शिता के लिए जानकारी सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है। एक ओर, जब ठाणे मनपा वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रही है, तो स्वीकृत या उपलब्ध सरकारी निधि से अधिक दर पर टेंडर प्रक्रिया को लागू करने के पीछे के कारणों को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
मांग की गई है कि आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और कल तक प्रशासनिक शासन के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की महाराष्ट्र राज्य के मुख्य सचिव की देखरेख में पूरी जांच की जाए और संबंधित मनपा आयुक्तों से लेकर अधिकारियों तक सभी के खिलाफ दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाए। संजय घाडीगांवकर ने इसके लिए फॉलो-अप शुरू कर दिया है, और ठाणे मनपा क्षेत्र में वागले एस्टेट प्रभाग समिति, लोकमान्य-सावरकर नगर के साथ-साथ दिवा प्रभाग समिति , नौपाड़ा कोपरी और दूसरी प्रभाग समिति में हुई गड़बड़ियों की ज़िम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर तय की जाएगी और इसके लिए सही कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ऐसा भी उन्होंने कहा है। ठाणे शहर के हर चौक-चौराहे पर आज यह चर्चा हो रही है कि प्रशासन को टैक्स के पैसे और सरकारी फंड को जनता के सामने पेश करने की ज़िम्मेदारी से बचना नहीं चाहिए। मुख्यमंत्री की सामाजिक भागीदारी की चुनौती का मकसद सिर्फ़ उनके भाषण तक ही सीमित था या यह उनके और उनके प्रशासन के कामों में भी होगा, अब यह मुख्यमंत्री के ऑफिस पर निर्भर करता है।


