



ठाणे [ युनिस खान ] अपना संपूर्ण जीवन देव , देश और धर्म के लिए लगाने वाले राजा छत्रपति शिवराय का मंदिर सभी के लिए अत्यंत गौरव और प्रेरणादायक है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने आज कहा कि यहां महाराज के दर्शन करने आने वाले हर व्यक्ति को निश्चित रूप से प्रेरणा मिलेगी। भिवंडी के शिवक्षेत्र मराडे पाड़ा में छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर (शक्तिपीठ) का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के हाथो किया गया।
इस अवसर पर स्वामी गोबिंद देवगिरिजी महाराज, परमपूज्य बालयोगी सदानंद बाबा, डॉ. कैलास महाराज निचिते, राष्ट्रसंत नीलकंठ शिवाचार्य, आलोक नाथ महाराज, सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल, विधायक किसन कथोरे, विधायक दौलत दरोदा, विधायक निरंजन डावखरे, विधायक महेश चौघुले, शिवक्रांति फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष राजू चौधरी, विश्वनाथ पाटिल, नरेंद्र पवार, जितेंद्र डाकी, विभागीय आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी, विशेष पुलिस महानिरीक्षक कोंकण जोन संजय दराडे, जिलाधिकारी अशोक शिनगारे, प्रमुख कार्यकारी अधिकारी रोहन घुगे, पुलिस अधीक्षक डॉ.डी एस स्वामी, अनंत भोईर आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।
सबसे पहले मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने दर्शकों को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती की बधाई दी और छत्रपति शिवाजी महाराज के भव्य मंदिर की संकल्पना और वास्तविक निर्माण के लिए कैलास निचिते और राजू चौधरी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह छत्रपति शिवाजी महाराज के कारण ही है कि हम मंदिर में जा सकते हैं और अपने पसंदीदा देवता के दर्शन कर सकते हैं। जिस राजा ने अपना पूरा जीवन भगवान, देश और धर्म की सेवा में बिताया, उसका मंदिर होना बहुत गर्व की बात है। यह मंदिर बहुत ही सुंदर, भव्य और दिव्य बनाया गया है। इस मंदिर में एक सुंदर दुर्ग, एक बहुत अच्छा टॉवर, एक शानदार प्रवेश मार्ग, एक बगीचा है और इस मंदिर के माध्यम से महाराजा के जन्म से लेकर राज्याभिषेक और संभाजी महाराज की प्रगति तक बहुत सुंदर घटनाओं का मंचन किया गया है। इससे सभी को प्रेरणा अवश्य मिलेगी। जिस प्रकार हनुमान जी के दर्शन के बिना भगवान श्री राम के दर्शन पूर्ण नहीं होते, उसी प्रकार छत्रपति शिवराय के दर्शन के बिना किसी भी देवता के दर्शन पूर्ण नहीं होते।
शिवबा माता जिजाऊ के संस्कार एवं आशीर्वाद और उनकी प्रेरक शिक्षाओं के माध्यम से ही शिव राय ने मुगलों की चुनौतियों का विरोध करना शुरू किया। जिस तरह भगवन राम युग पुरुष थे। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति में अन्याय के खिलाफ लड़ने की शक्ति पैदा की। छत्रपति शिवाजी महाराज का कार्य भी ऐसा ही है। जिस तरह श्री राम ने रावण के खिलाफ लड़ते हुए आम लोगों को एकजुट किया, उसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज ने आम लोगों से ताकत जुटाई और मुगलों की शक्तिशाली सेना के खिलाफ भगवा झंडा फहराया। महाराजा को यह उम्मीद नहीं है कि महाराष्ट्र जाति के आधार पर विभाजित हो जाएगा। हम ऐसे महाराष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं जो ईश्वर, देश और धर्म के लिए सब कुछ बलिदान कर दे। देश का गौरव बढ़ाने का संकल्प ले। छत्रपति शिवाजी महाराज की 300वीं जन्म शताब्दी मनाई जा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री फड़नवीस ने देश निर्माण के कार्य में योगदान देने की अपील की।
उन्होंने आगे कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के बारह किलों को विश्व धरोहर के रूप में दर्ज कराने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। संगमेश्वर में छत्रपति संभाजी महाराज का एक स्मारक भी बनाया जाएगा जिसके लिए राज्य के बजट में प्रावधान किया गया है। पानीपत की लड़ाई तो हर कोई जानता है। महादजी शिंदे के कारनामे को हर कोई जानता है। उस स्थान पर एक भव्य स्मारक की भी योजना बनाई जा रही है।
छत्रपति शिवाजी महाराज की इस शक्तिपीठ, जिसका आज उद्घाटन हुआ है, को तीर्थ स्थल का दर्जा दिया जाएगा। इसी तरह भिवंडी-वाड़ा रोड का काम भी प्रगति पर है। यहां के लोक निर्माण विभाग को इस शक्तिपीठ के लिए आने वाले सभी मार्गों की योजना बनानी चाहिए और यहां आने वाले शिव प्रेमियों के लिए आवश्यक सुविधाएं मुहैया करनी चाहिए। सरकार इसके लिए तैयार है और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।