
ठाणे ( यूनिस खान ) ठाणे शहर की राजनीति में एक बार फिर कथित ‘गोल्डन गैंग’ को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व नगरसेवक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घाडीगांवकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से ठाणे में सत्ता, राजनीतिक वर्चस्व, ठेकेदारी व्यवसाय, आर्थिक हितसंबंध और कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। घाडीगांवकर ने सवाल किया है कि ठाणे की ‘गोल्डन गैंग’ आखिर है कौन? उन्होंने यह भी पूछा कि सत्ता, राजनीतिक वर्चस्व, कॉन्ट्रैक्ट व्यवसाय और आर्थिक हितों के बीच वास्तव में क्या संबंध है तथा आर्थिक लाभ और परस्पर संरक्षण के लिए क्या राजनीतिक गठजोड़ तैयार किए गए हैं? उन्होंने जनसेवा और आर्थिक हितों के बीच कथित संबंधों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि जनता के हितों से जुड़े मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं होती और क्या राजनीतिक दबाव के कारण प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है?
पूर्णेकर हत्याकांड का संदर्भ
ठाणे के राजनीतिक माहौल में चर्चा में आए प्रदीप उर्फ बालू पूर्णेकर हत्याकांड का संदर्भ देते हुए घाडीगांवकर ने इस मामले की गहन जांच ठाणे पुलिस के बजाय महाराष्ट्र सीआईडी पोलीस द्वारा करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। घाडीगांवकर ने कहा कि पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
मीनाक्षी शिंदे ने भी उठाए सवाल
पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे ने भी इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में राजनीतिक वातावरण को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपों की सच्चाई जांच के बाद स्पष्ट होगी और पुलिस विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की भूमिका भी स्पष्ट की है।
घाडीगांवकर के प्रमुख सवाल
ठाणे की ‘गोल्डन गैंग’ आखिर कौन है? सत्ता, राजनीतिक वर्चस्व, कॉन्ट्रैक्ट व्यवसाय और आर्थिक हितों के बीच क्या संबंध है? आर्थिक लाभ और परस्पर संरक्षण के लिए क्या राजनीतिक गठजोड़ किए गए हैं क्या ? जनसेवा और आर्थिक हितों से जुड़े कथित राजनीतिक संबंधों की सच्चाई क्या है? जनता की शिकायतों पर कार्रवाई होती है या राजनीतिक दबाव के कारण सरकारी तंत्र क्यों प्रभावित होता है? घाडीगांवकर ने स्पष्ट किया कि इन सवालों का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सत्ता, प्रशासन और आर्थिक हितों के बीच कथित संबंधों की निष्पक्ष जांच की मांग करना है। उन्होंने मांग की कि यदि किसी प्रकार के गैरकानूनी संबंध, आर्थिक हित अथवा राजनीतिक संरक्षण सामने आता है, तो कानून के अनुसार संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।


