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शिक्षक युवा बनकर पढ़ायें , आपकी चेतना ही छात्रों की प्रेरणा है – यजुर्वेद महाजन 

ठाणे [ युनिस खान ]  बदलते समय के साथ छात्रों को पढ़ाते समय शिक्षक युवा होकर पढ़ाएं, क्योंकि आप में जो चेतना है वह छात्रों की प्रेरणा है।  विद्यार्थी आपको तभी स्वीकार करेंगे जब आप सकारात्मक रहेंगे और परिवर्तनों को स्वीकार कर उन्हें आत्मसात करेंगे। यह मंत्र शिक्षकों को दीपस्तंभ संस्था के संस्थापक और शिक्षा के क्षेत्र में विद्वान यजुर्वेद महाजन ने दिया है।
स्वतंत्रता अमृत महोत्सव वर्ष निमित्त जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षा विभाग ने गडकरी रंगायतन में शिक्षकों के लिए प्रेरक ‘भरारी’ कार्यशाला का आयोजन किया था। जिसमें  महाजन ने शिक्षकों से संवाद के दौरान इस आशय का उदगार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।  अगर हम इसे पढ़ लेंगे तो कुछ नहीं होगा।  लेकिन सफलता तभी मिल सकती है जब हम सोचें और उन कठिनाइयों को दूर करने का फैसला करें।  उन्होंने कहा कि छात्रों को मास्टर की भूमिका से पढ़ाना, छात्रों की देखभाल और जिम्मेदारी लेना और कक्षा में चेहरे पर मुस्कान रखना ये तीन चीजें हैं। जो छात्रों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने में सहायक होंगी।  उन्होंने शिक्षकों से यह भी कहा कि आप छात्रों को इंसान के रूप में आत्मविश्वास के साथ दुनिया में रहना सिखाएं और छात्रों को सामाजिक बनाएं।
ठाणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा भाऊसाहेब डांगड़े, उपाध्यक्ष सुभाष पवार, परियोजना निदेशक छाया देवी शिसोड़े, शिक्षा अधिकारी शेषराव बड़े, आहार प्राचार्य भरत पवार, शिक्षा समिति के आमंत्रित सदस्य चिंतामणि वेखंडे, उप शिक्षा अधिकारी ललित दहितुले,  गोमासे सहित समूह शिक्षा अधिकारी, केंद्र प्रमुख, प्रधानाध्यापक और शिक्षक उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा भाऊसाहेब डांगडे ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए कहा कि कोविड काल में स्कूल बंद थे लेकिन पढ़ाना नहीं थमा।  स्कूलों ने ऑनलाइन संचालन जारी रखा।  ऑनलाइन कार्य करते हुए शिक्षकों ने कोविड काल में सर्वेक्षण में प्रशासन का भरपूर सहयोग किया।  हालांकि कोविड काल में स्कूलों और शिक्षकों के विभिन्न सवालों का समाधान किया गया।  इसमें प्रधानाध्यापक, विस्तार अधिकारी पदोन्नति, शिक्षक चयन श्रेणी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता दी गई है।  उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष में 300 स्कूलों में पुस्तकालय स्थापित किए जाएंगे।
इस मौके पर जिला परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष पवार ने कहा कि वह बजट में स्कूलों को भौतिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त प्रावधान करेंगे। उन्होंने वैजोला स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि गुणवत्ता होगी तो छात्र स्वतः ही जिला परिषद स्कूल में आ जाएंगे।  उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के कई छात्र जिला परिषद स्कूलों में आ रहे हैं।  उन्होंने स्कूलों को कला से संबंधित उपकरण उपलब्ध कराने की अपनी मंशा व्यक्त की क्योंकि कला खेल और संगीत छात्रों को आकर्षित करती है।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में परियोजना निदेशक छाया देवी शिसोदे एवं शिक्षा अधिकारी शेषराव बड़े ने अपने विचार व्यक्त किये।  इस दौरान दीप जलाकर और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले और महात्मा जोतिबा फुले की प्रतिमाओं की पूजा कर उनका अभिनंदन किया गया।

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