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सिडबी के ऋण और अग्रिम वित्तीय वर्ष 2021 की तुलना में 29% की वृद्धि दर्ज़ की

31 मार्च 2022 तक रु. 2 लाख करोड़ की सीमा पार करके रु. 2,02,252 करोड़ पर पहुंची 

मुंबई : भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की 24वीं आम बैठक 25 जून 2022 को उसके प्रधान कार्यालय, लखनऊ में सम्पन्न हुई। इस आम बैठक में 31 मार्च 2022 को समाप्त वर्ष के सिडबी के अंकेक्षित वित्तीय परिणाम अनुमोदित किए गए।सिडबी के अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक श्री सिवसुब्रमणियन रमण, आईएएंडएएस ने सदस्यों को वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान व्यवसाय में हुई अच्छी वृद्धि की जानकारी दी। बताया गया कि सिडबी ने सभी कारोबारी वर्टिकलों में समग्र रूप से वृद्धि हासिल की है। सिडबी के संवितरण वित्त वर्ष 2021 के रु. 96029 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2022 में रु. 143758 करोड़ हो गये। इस प्रकार उनमें 50% की वृद्धि दर्ज़ हुई। बैंक की कुल आस्तियाँ रु. 1.92 लाख करोड़ से 29% बढ़कर रु. 2.47 लाख करोड़ हो गयीँ। वित्त वर्ष 2022 के दौरान बैंक को रु. 9139 करोड़ की आय और रु. 1958 करोड़ का निवल लाभ हुआ। इसकी नेट वर्थ 14% बढ़कर रु. 23497 करोड़ हो गयी। प्रति शेयर अर्जन (ईपीएस) वित्तय वर्ष 2022 में रु. 36.79 रहा। यथा 31 मार्च 2022 बैंक के निवल बकाया के प्रति सकल और निवल अनर्जक आस्तियाँ क्रमशः 0.11% और 0.07% रहीं। यथा 31 मार्च 2022 बैंक का पूँजी पर्याप्तता अनुपात 24.28% रहा। महामारी से ग्रस्त वर्ष होने के बावजूद बैंक ने अपनी अग्रणी स्थिति बरकरार रखी और प्रमुख मानदंडों की दृष्टि से वृद्धि हासिल की। आम बैठक में वित्त वर्ष 2022 के लिए 15% लाभांश अनुमोदित किया गया।

श्री रमण ने कहा कि सिडबी एमएसएमई क्षेत्र को सुदृढ़ करने और उसकी जड़ों की गहराई तक ले जाने के लिए कार्यरत हैं। जिस प्रकार भारत सरकार भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना चाहती है, उसी प्रकार सिडबी का लक्ष्य अपनी बैलेंस शीट को बढ़ाकर रु. 5 ट्रिलियन तक ले जाना है, ताकि एमएसएमई क्षेत्र के ऋण में वृद्धि की जा सके।भारतीय रिज़र्व बैंक ने सिडबी को विशेष तरलता निधि की सुविधा प्रदान की है, जिसका उपयोग करते हुए सिडबी ने कई नवोन्मेषी योजनाएं आरंभ कीं, ताकि एमएसएमई क्षेत्र, खास तौर से छोटी/अल्प सेवित/असेवित एमएसई की अल्प कालिक और मध्य कालिक ज़रूरतों को पूरा किया जा सके। इनमें से कुछ योजनाएं इस प्रकार हैं-

  • सिडबी एमएसएममई कोविड रेस्पॉन्स फंड (एसएमसीआरएफ)- इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थाओं जैसे एनबीएफसी, फिनटेक कंपनियों तथा माइक्रो फाइनैंस कंपनियों की ऋण लिखतों में निवेश के माध्यम से एमएसएमई/ छोटे व्यवसायों/ अल्प वित्त उधारकर्ताओं को निधि उपलब्ध कराना है।
  • आंशिक गारंटी समूह ऋण इश्युएंस स्कीम– इसके अंतर्गत बैंक द्वारा ऐसे मध्यम आकार के एनबीएफसी तथा एमएफआई को ऋण दिया जाएगा जिनका प्रबंधन और कामकाज अच्छा है। इस ऋण के लिए तृतीय पक्ष/व्यवस्थापक द्वारा सामूहिक आंशिक गारंटी उपलब्ध होगी।
  • विनियमित संस्थाओं के माध्यम से सहायतायोजना– इस योजना में दो स्तरों पर वित्तीय मध्यस्थों का उपयोग होगा। इसमें रेटिंग-प्राप्त विनियमित संस्थाओं (एनबीएफसी, एमएफआई, बैंकों/लघु वित्त बैकों) को संसाधन सहायता दी जाएगी, ताकि वे अपेक्षाकृत छोटे और बिना रेटिंग-प्राप्त /निम्न रेटिंग-प्राप्त एनबीएफसी/एमएफआई को आगे ऋण दे सकें।

सिडबी अनेक डिजिटल प्रयासों को विकसित करन में अग्रणी रहा है, जैसे पीएसबी लोन्स इन 59 मिनट्स तथा रिसीवेबल्स एक्सचेंज ऑफ इंडिया (आरएक्सआइएल) (ट्रेड्स प्लैटफॉर्म)। वित्तपोषण और विकास, इन दोनों भूमिकाओं का समावेश करते हुए सिडबी ऋण-प्रदायगी के नये-नये माध्यम विकसित कर रहा है। ऐसा ही एक माध्यम विकसित किया जा रहा है जीएसटी सहाय, जो छोटे व्यवसायों के इन्वॉइस-आधारित (इन्वॉइस-डिस्काउंटिंग नहीं) वित्तपोषण के लिए पहला रेफरेंस ऐप है। बैंक एमएसएमई फॉर्मलाइजेशन प्रोजेक्ट नामक एक अन्य डिजिटल पहल का लक्ष्य हासिल करनेवाला है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई के लिए शासन, बाजार तथा वित्तीय सेवाओं तक बेहतर डिजिटल पहुँच मुहैया कराना है। उद्यम रजिस्ट्रेशन के ज़रिए अनौपचारिक क्षेत्र के लिए नये दरवाज़े खुलने की उम्मीद है, ताकि वे औपचारिक संस्थाओं से सहायता पा सकें। सिडबी ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) को सहायता दे रहा है।

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