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वक्फ की जमीन अपने उद्योगपति मित्रों को देने के लिए सरकार ने लाया काला कानून – डॉ जितेन्द्र आव्हाड

ठाणे [ युनिस खान ] वक्फ बोर्ड बेस कीमती जमीनों पर धन्ना शेठों की नजर है और सरकार अपने उद्योगपति मित्रों को खुश करने के लिए मुसलमानों के वक्फ की जमीन हड़पने के लिए वक्फ संशोधन क़ानून थोपने का प्रयास करा रही है। इस आशय का उदगार पूर्व मंत्री व राकांपा शरद पवार पार्टी के विधायक डॉ जितेन्द्र आव्हाड ने व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार मुसलमानों की भलाई क्या करेगी। संविधान ने देश के नागरिकों धार्मिक स्वतंत्रता दिया है।  नया वक्फ संशोधन कानून संविधान के खिलाफ है और सब हिन्दू मुस्लिम संविधान और दस्तूर के साथ एक हैं।

       मुंब्रा के नूर बाग़ हाल में वक्फ संशोधन क़ानून के खिलाफ जन समर्थन जुटाने के लिए आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की सभा आयोजित की गयी। जिसमें समाजवादी पार्टी के विधायक आबू आसिम आजमी ,एम आई एम के विधायक वारिस पठान , पूर्व नगर सेवक अशरफ शानू पठान ,राकांपा अध्यक्ष शमीम खान , सपा अध्यक्ष अब्दुल मन्नान शेख के आलावा बड़ी संख्या में उलेमा और नागरिक उपस्थित थे। डॉ आव्हाड ने अपने संबोधन में कहा कि जब मई अल्पसंख्यक विभाग का मंत्री था मैंने वक्फ की जमीन के 7 / 12 पर वक्फ दर्ज करने का आदेश दिया था। वक्फ दज होने से उक्त जमीन बेंची नहीं जा सकती। आज हजारों साल पहले बाप दादाओं द्वारा दान की गयी जमीनों का कागज़ माँगा जा रहा है। वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्य लाने का प्रयास किया जा रहा है जब न्यायमूर्ति संजय खन्ना ने पूंछा की कितने मंदिर ट्रस्टों में मुस्लिम सदस्य रखा गया है तो सरकार को कोई जवाब नहीं सुझा। उन्होंने कहा की कुछ गलियां हमसे भी हुई हैं मुंबई में यतीम खाने की जमीन अंबानी को बेच दी। उन्होंने कहा कि हम वक्फ को जमीन देते है तो हमें कोई रोक नहीं सकता है। इस लड़ाई हिन्दू मुस्लिम सब एक साथ हैं।
       सपा विधायक आजमी ने कहा कि मुसलमानों के साथ सरकार भेदभाव कर रही है। जब किसानों पर काला क़ानून थोपने का सरकार प्रयास कर रही थी जब किसानों ने बड़ा आन्दोलन किया और सैकड़ों किसान शहीद हो गए। अन्तः सरकार को क़ानून वापस लेना पड़ा। उसी तरह सेक्युलर हिन्दुओं को साथ लेकर मुसलमानों को आन्दोलन करना पड़ेगा। केंद्र में बैठी सरकार को यह भी क़ानून वापस लेना पड़ेगा। उन्होंने वादा किया कि वक्फ के मुद्दे पर उलेमाओं की एक आवाज पर हम जान देने के लिए तैयार हैं।  विधायक वारिस पठान ने कहा कि संविधान में मिले अधिकारों क वक्फ संशोधन क़ानून उलंघन करता है और यह काला क़ानून मुसलमानों की जमीन छीनने के लिए लाया गया है। मुंबई में आगा खान ट्रस्ट की जामीन पर अंबानी ने आलिशान ईमारत बना लिया है उसे बचाने का कार्य सरकार कर रही है। अभी सरकार हमारी जमीनें छिनने का कार्य कर रही आगे हम क्या खाएं क्या नहीं इसका भी फैसला सरकार करना चाहती है। उसे यह काला क़ानून वापस लेना पड़ेगा।
       शिया समुदाय के मौलाना अली असगर हैदरी ने कहा कि देश में इस्लाम है और मुसलमान हैं , शिया और सुन्नी अलग नहीं दोनों भाई हैं। हमें फिरकों में बांटने की कोशिस न की जाये। हम सब मिलकर वक्फ की लड़ाई में उलेमाओं के पीछे खड़े रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद मामले में हमारे खिलाफ फैसला दिया तो हमने न्यायालय के फैसले को मान लिया। वहीँ जब सरकार के खिलाफ न्यायालय का फैसला आता है तो सरकार उसे स्वीकार नहीं करती बल्कि कानून और जज को बदलने का कार्य करती है।
         जमीयत के मौलाना हलिमुल्ला ने कहा की ११ सालों से केंद्र की सत्ता में बैठी सरकार झूठ पर झूठ बोलकर दुष्प्रचार कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ मंदिर ट्रस्टों के पास 10 लाख एकड़ जमीन है यह नहीं बताया गया। 400 वर्ष पुरानी वक्फ की गयी जमीनों का कागज़ अब कहाँ से लायें। सरकार वक्फ जमीन की सुरक्षा करना चाहती तो उसे कब्ज़ा हटाने का क़ानून लाना चाहिए था लेकिन सरका वक्फ की जमीन पर कब्ज़ा करना चाहती है। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड , मुंबई के संयोजक मौलाना महमूद दरियाबादी ने कह कि सरकार झूठी है हम वक्फ संशोधन कानून का विरोध कर रहे हैं उसे हमारी बात सुनना चाहिए। मस्जिदों में नमाज पढ़ने के लिए हम पैसे नहीं देते लेकिन दिल्ली में नमाज पढ़ने के लिए पैसे लेने की शुरुआत हो गयी। सरकार चाहेगी तो जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने पर टिकट लगा देगी। इस काले कानून पर रोक नहीं लगा तो बड़ी बड़ी मस्जिदें मुसलमानों के हाथो से निकल जायेगी। मौलाना उबैद आजमी ने कहा कि इससे पहले भी हमारे खिलाफ कई क़ानून लादने का प्रयास हुआ। मुसलमानों ने एकजुटता से विरोध किया। इसका भी संविधान के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण विरोध करने पर इसे भी वापस लेगा होगा। इसके लिए सभी मुसलमानों को अपने फिरके को साईड में रककर एक जुट होना पड़ेगा।

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