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राजद्रोह क़ानून की आवश्यता पर सर्वोच्च अदालत की टिप्पणी का विपक्षी दलों ने किया स्वागत

नयी दिल्ली [ युनिस खान ] सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूंछा है की क्या आजादी के 75 वर्ष बाद राजद्रोह क़ानून की आवश्यकता है .शीर्ष अदालत ने औपनिवेशिक काल के राज द्रोह संबंधी दंडात्मक क़ानून के भरी दुरुपयोग के मुद्दे पर चिंता जताते केंद्र सरकार से सवाल किया है .सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि स्वतंत्रता संग्राम की लिए महात्मा गांधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज दबाने के ली अंग्रेजी शासन काल में उपयोग करने के प्रावधानों को समाप्त क्यों नहीं किया जा रहा है . कांग्रेस नेता राहुल गाँधी समेत अनेक विरोधी दलों के नेताओं ने सर्वोच्च अदालत की टिप्पणी का स्वागत किया है राहुल गाँधी ने कहा है कि हम सर्वोच्च अदालत की टिप्पणी का स्वागत करते हैं . इस भाजपा महासचिव ने कहा है कि 2004 से 2014 तक केंद्र में आपकी सरकार थी तो तब आप क्या करा रहे थे .उन्होंने टयूट कर कहा है कि इस कानून को समाप्त करने के लिए आपकी सरकार को किसने रोका था . इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कई नेताओं ने याद दिलाया कि किसान आन्दोलन के दौरान हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष की कार पर हमला के बारे राज्य के करीब सौ किसानों पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया .  मोईत्रा ने कहा की अब उम्मीद है कि अब इस क़ानून का भारत सरकार द्वारा दुरुपयोग समाप्त होगा . पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा है कि किसानों पर लगाए गए राजद्रोह का केस वापस लिया जाना चाहिए . वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि असहमति को दबाने के लिए राजद्रोह के क़ानून का पूरी तरह दुरुपयोग कर सरकार से सवाल करने के लिए सर्वोच्च अदालत और चीफ जस्टिस की सरहना की जानी चाहिए .

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