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79% इंटरसिटी बस यात्रियों को लगता है कि सेवाओं में एकरूपता का अभाव , न्यूगो ट्रैवल इनसाइट्स का खुलासा

मुंबई [ अमन न्यूज नेटवर्क ] ग्रीनसेल मोबिलिटी के प्रमुख इंटर-सिटी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कोच ब्रांड न्यूगो ने दुनिया की अग्रणी इनसाइट्स और कंसल्टिंग कंपनी कांतार की साझेदारी में 10 शहरों के 2800 से ज्यादा प्रतिभागियों के साथ अपनी तरह की पहली साक्षात्कार-आधारित स्टडी की है। भारतीय इंटर-सिटी यात्रियों की जरूरतों को समझना इस स्डटी का उद्देश्य था और पता चला कि 79% इंटर-सिटी यात्रियों की नजर में बस यात्रा के विभिन्न पहलुओं, जैसे समय की पाबंदी, स्वच्छता / हाईजीन, भोजन और पेय पदार्थों के इंतजाम में मानकीकरण की कमी है।

इस स्टडी में गुणात्मक और मात्रात्मक रिसर्च दोनों का उपयोग करते हुए कई बस यात्री सेगमेंट- प्रीमियम एसी, एफोर्डेबल एसी, नॉन-एसी वगैरह शामिल किए गए थे। निजी बस ऑपरेटरों, ऑफलाइन टिकट एजेंटों और ऑनलाइन समूहक जैसे इंटर-सिटी बस यात्रा हितधारकों के बीच एक गुणात्मक शोध सर्वेक्षण भी संचालित किया गया। इंटर-सिटी बस यात्रियों में से अधिकांश 35 वर्ष की औसत आयु वाले कामकाजी पुरुष पाए गए।

स्डटी आगे बताती है कि परिवार या दोस्तों के साथ यात्रा करने को प्राथमिकता देने के साथ देश भर के यात्रियों के लिए छुट्टियां यात्रा करने का सबसे बड़ा कारण (58%) बनती हैं। क्षेत्रवार आंकड़ों से पता चलता है कि छुट्टियां बिताने के लिए पश्चिम (56%) और दक्षिण भारत (55%) के मुकाबले उत्तर भारत में (70%) ज्यादा यात्राएं की जाती है। परिवहन का साधन और तरीका चुनते समय आराम, हाईजीन और सुरक्षा के साथ-साथ स्वच्छता पर सबसे ज्यादा विचार किया जाता है।

कोविड-19 के बाद जीवन के हर पहलू में उपभोक्ताओं के लिए हाईजीन और स्वच्छता अहम हो गई है। समग्र स्तर पर सुरक्षा तीसरा सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।अलबत्ता महिलाओं के बीच यात्रा के तरीके का चयन प्रभावित करने वाले कारकों का क्रम अलग होता है। महिलाओं के लिए सुरक्षा सर्वोपरि है, इसके बाद स्वच्छता आती है।

इन कारकों का क्रम जोन के अनुसार भी बदलता है। दक्षिण भारत में यात्रियों के लिए सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है जबकि उत्तर और पश्चिम भारत में यात्री आराम को ज्यादा तरजीह देते हैं। उत्तर भारत के यात्री कीमतों को लेकर भी ज्यादा संवेदनशील प्रतीत होते हैं क्योंकि यह उनके लिए दूसरा सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है, जबकि पश्चिम भारत में इसका चौथा और दक्षिण में तीसरा स्थान है। भारत में लगभग 3,60,000+ इंटर-सिटी बसें मौजूद हैं, जिनमें से केवल 50,000 ही एसी बसें हैं। इस एसी बस सेगमेंट के प्रीमियम एसी बस मार्केट में लगभग 15,000 बसें शामिल हैं। बस एसी मार्केट में सीएजीआर की वृद्धि 20-25 फीसदी रहने का अनुमान है।

 

 

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