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आधुनिक तकनीक से सृजित रोजगार और व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्र में पहुँचाने से भारत बनेगा महाशक्ति – डा अनिल काकोडकर 

ठाणे [ युनिस खान ] विज्ञान को अनुक्रमिक पाठ्यक्रम की तुलना में अधिक गहन और सुलभ तरीके से समझने के लिए हर जिले में एक विज्ञान केंद्र की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों के मन में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा होगी। अधिक संख्या में छात्र विज्ञान की ओर रुख करेंगे। आधुनिक तकनीक से सृजित रोजगार और व्यवसाय के अवसर ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को उपलब्ध कराए जाएं तो देश का महाशक्ति बनने का सपना जल्द पूरा होगा।

         इसी तरह, ठाणे में भी एक विज्ञान केंद्र स्थापित किया जाएगा और ठाणे मनपा ने इसके लिए पहल की है। मनपा ने उस परियोजना में मराठी विज्ञान परिषद को भी शामिल किया है। वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक डा अनिल काकोडकर ने ठाणे मनपा विचार-मंथन व्याख्यान श्रृंखला के आठवें संस्करण को प्रस्तुत किया।

       भारतीय स्वतंत्रता की 76 वीं वर्षगांठ के अवसर पर डा अनिल काकोडकर के साथ एक साक्षात्कार का आयोजन किया गया।  मनपा आयुक्त अभिजीत बांगर ने डा काकोडकर, उनकी पत्नी सुयशा काकोडकर, समीर कर्वे का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मराठी विज्ञान परिषद के ठाणे विभाग के अध्यक्ष डी के सोमण एवं कार्यवाह प्रा.  नामदेव मांडगे का भी आयुक्त बांगर ने स्वागत किया। इस अवसर पर मनपा के अतिरिक्त आयुक्त (1) संदीप मालवी और अतिरिक्त आयुक्त (2) प्रशांत रोडे भी मौजूद थे।

         साक्षात्कार में डा काकोडकर ने बचपन से लेकर अपने सफर के बारे में बताया। उन्होंने भारत द्वारा 1974 और 1998 में किए गए परमाणु परीक्षणों, दुनिया भर में इसके प्रभावों, देश की रक्षा और विकास के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग पर भी अपने विचार रखे। साथ ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग से क्या हासिल किया जा सकता है, इस पर भी चर्चा की गई। उनका मानना है कि यदि आधुनिक तकनीक से सृजित रोजगार और व्यवसाय के अवसर ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को उपलब्ध कराए जाएं तो देश का महाशक्ति बनने का सपना जल्द पूरा होगा।

         यदि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आधुनिक तकनीक पर आधारित कृषि प्रसंस्करण और अन्य व्यवसाय उपलब्ध होंगे, तो वहां से शहरों की ओर पलायन रुकेगा और परिणामस्वरूप, शहरों का शहरीकरण कम होगा। डा काकोडकर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।

        उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हम गैर-पारंपरिक स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त करने के लिए हमारे सामने परमाणु ऊर्जा के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है, जो विकास प्रक्रिया में अपरिहार्य है।

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