
ठाणे ( यूनिस खान ) विद्यार्थियों को केवल अच्छे अंक हासिल करने की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जीवन में मिलने वाले अवसरों का सदुपयोग करते हुए समाज के लिए क्या योगदान दे सकते हैं, इस पर भी विचार करना चाहिए। यह आह्वान राकांपा शरदचंद्र पवार कर विधायक डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने किया। ठाणे के बालासाहेब ठाकरे कला दालन में साधना ताई प्रधान की पहल पर सिद्धांत प्रतिष्ठान की ओर से कॉलेज के विद्यार्थियों और करियर के नए अवसर तलाश रहे युवाओं के लिए दो दिवसीय ‘जुनून’ युवा महोत्सव का आयोजन किया गया था। महोत्सव का समापन डॉ. जितेंद्र आव्हाड की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के जिलाध्यक्ष मनोज प्रधान भी मंच पर उपस्थित थे। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए डॉ. आव्हाड ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन के इतिहास और उनके विचारों से देश को हुए लाभ के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के देश निर्माण में योगदान, उनके निधन के बाद इंदिरा गांधी द्वारा देश की जिम्मेदारी संभालने और उनके नेतृत्व में बांग्लादेश के निर्माण की ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया।
डॉ. आव्हाड ने कहा कि आज हम अच्छी कमाई तो कर रहे हैं, लेकिन समाज के लिए हमारा योगदान क्या है, यह सवाल हर व्यक्ति को खुद से पूछना चाहिए। पहले 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर मिठाइयां बांटी जाती थीं और लोगों में देश की आजादी तथा गणतंत्र दिवस को लेकर विशेष उत्साह रहता था। लेकिन आज इन दिनों को केवल छुट्टी के रूप में देखा जाता है। युवाओं को छुट्टी के दिन सोकर समय बिताने के बजाय यह सोचना चाहिए कि वे देश के लिए क्या कर सकते हैं।
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सभी राजनेता झूठ बोलते हैं और इसमें वे स्वयं भी शामिल हैं। उन्होंने राजनीतिक व्यवस्था में आत्ममंथन की आवश्यकता पर जोर दिया। आव्हाड ने कहा कि हमारा पूरा जीवन लोकतंत्र पर निर्भर है, इसलिए युवाओं को लोकतंत्र का महत्व समझना चाहिए।
उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि जो भी काम करें, पूरे जुनून के साथ करें। विद्यार्थियों को नियमित रूप से समाचार पत्र और पुस्तकें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। देश का इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और महापुरुषों के योगदान को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के द्वार नहीं खोले होते, तो आज अनेक लोगों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलता। वहीं, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के योगदान से वंचित समाज को अधिकार, हक और स्वतंत्र पहचान मिली। इसलिए महापुरुषों के योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र आव्हाड ने साधना ताई प्रधान की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं मिलता, बल्कि जीवन को देखने और समझने की एक नई दृष्टि भी प्राप्त होती है। साधना प्रधान में युवाओं को ऐसी दृष्टि देने की क्षमता है। दो दिवसीय इस युवा महोत्सव में लगभग दो हजार से अधिक युवक-युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महोत्सव में करियर जोन, ठाणे की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाने वाली प्रदर्शनी, मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए ‘फुलपाखरू’ विभाग और ‘फ्यूचर ऑफ हेल्थ जोन’ विशेष आकर्षण रहे।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से त्वचा की जांच, क्रायोथेरेपी, रेड लाइट थेरेपी, ईएमएस सूट, लिम्फैटिक कम्प्रेशन, हाइड्रोजन इनहेलेशन और पैरों के विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीक आधारित सुविधाओं से युवाओं को रूबरू कराया गया। कविता, संगीत, कहानी सुनाने की कला और स्टैंड-अप कॉमेडी जैसी विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी महोत्सव को खास बनाया। शिक्षा, करियर, स्वास्थ्य, तकनीक और कला के अनूठे संगम के रूप में ‘जुनून’ युवा महोत्सव युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।


