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सत्ता के करीब पहुंचकर सत्ता से दूर होती कांग्रेस को आत्ममंथन की आवश्यकता 

नई दिल्ली [ युनिस खान ] बिहार में सरकार विरोधी लहर के बावजूद कांग्रेस की ढिलाई महागठबंधन को सत्ता से बाहर रखने का कारण माना जा रहा है . इससे बिहार ही नहीं पूरे देश में कांग्रेस समर्थकों को निराशा हुई है . कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करने व जनाधार बढाने के लिए आत्ममंथन करने की आवश्यकता है . पार्टी नेताओं के सुझाव   देने व कमियों को गिनाने वाले नेताओं को पार्टी विरोधी बताने की कोशिस उसके इ घटक बनती जा रही है .कांग्रेस को देश में अपनी जड़ें जमानी है तो  उसमें अनुभवी व जनाधार वाले नेताओं को आगे लाना होगा . जबतक  कांग्रेस अपने परंपरागत समर्थक रहे लोगों को जोड़ने और उनमें विश्वास स्थापित करने के उद्देश्य से संगठन को चुस्त दुरुस्त नहीं करती उसे भाजपा का मुकाबला करना आसान नहीं होगा .  कांग्रेस को भाजपा और उसकी सरकारों के खिलाफ जनमानस तैयार करने के लिए अधिक प्रयास की जरुरत है . इसके लिए उसे संगठन न नए लोगों को जोड़ना पड़ेगा .  कांग्रेस को पुनः सत्ता स्थापित करने करने के लिए सबसे पहले पूर्ण कालिक अध्यक्ष देना होगा . इसके साथ सभी राज्यों , विभाग व जिला स्तर प्रभारी निरीक्षक नियुक्त कर जनता के बीच जाना होगा . राष्ट्रीय मुद्दे उठाकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर बेनकाब करने का प्रयास किया लेकिन उसने नेताओं को जनता पसंद नहीं कर रही जिसका कारण जनता से दूर होना माना जा रहा है . कांग्रेस देश के लिए तो अच्छा काम करती है उसकी नीतियाँ लोगों को पसंद आती है लेकिन लोग जिस तरह उसके समर्थन में होना चाहिए वैसा दिखाई नहीं देता है . कांग्रेस को लोग चाहते भी हैं लेकिन कांग्रेस जनता के समर्थन को वोट में परिवर्तित कराने में सफल क्यों नहीं हो रही है . इस पर कांग्रेस आला कमान को आत्ममंथन करने जरुरत है . यदि पार्टी की कमियों को दूर करने व संगठन को  करने का मुद्दा उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही तो उसे अपनी कमजोरी का पता नहीं चलेगा . कांग्रेस को कैडर तौयार  करने के लिए कार्यकर्ताओं को ताकत देने पडेगा . कार्यकर्ता मजबूत होगा तो ही पार्टी को मजबूत करने में योगदान दे सकता है . सैनिक को कमजोर रखकर कर जंग जीतना कितना आसान होगा . इस पर कांग्रेस को विचार करना होगा . जब मुखिया चापलूसी करने वालों से घिरे रहे  तब तब कांग्रेस की क्या हाल हुई है .उसे अतीत में झाँक कर देखना होगा .अपनी तारीफ करने वालों से अधिक आलोचकों पर ध्यान देना होता है . सत्ता के करीब पहुँचकर कांग्रेस सत्ता से दूर जा रही है और विरोधी दल सत्ता दूर होने के  बावजूद  सत्ता में बैठने में सफल हो जाती है . अपने लोगों का विश्वास व मनोबल बढाने के लिए इन तमाम मुद्दों से उसे कुछ सीख लेना होगा .

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