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चंद्रयान 3 की सफलता से दुनिया के बड़े देश भारत की ओर देखने लगे – डी के सोमन 

ठाणे [ युनिस खान ] आजादी के पहले भारत में सुई नहीं बनती थी आज हमने चंद्रयान 3 को चाँद पर उतारकर कर एक बड़ी उपलब्धि हाशिल की है। जिससे पूरी दुनिया भारत की और देखने लगी है। हमने जो सफलता हाशिल की है यह कार्य अमेरिका भी नहीं कर सका है। इस आशय का उदगार खगोलशास्त्री डी के सोमन ने हिन्दी भाषी एकता परिषद् की ओर से आयोजित हिन्दी दिवस कार्यक्रम में व्यक्त किया।  उन्हें आगे कहा कि तकनीकी में अग्रणी विश्व के देशों ने हमें तकनीकी न देकर एक प्रकार से हमारे ऊपर अहसान किया है।

     आयोजन को सफल बनाने के लिए एड दरम्यान सिंह बिस्ट और परिषद के सभी पदाधिकारियों ने परिश्रम किया। प्रतियोगिता में विजेताओं को नगद पुरस्कार , स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में पूर्व न्यायाधीश सुरेश द्विवेदी , ओमप्रकाश शर्मा , प्रदीप गोयन्का समेत शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। खगोलशास्त्री सोमन ने कहा कि आज मिडिया नकारात्मक हो गयी है जिससे झूठ और सही जानना मुश्किल हो गया है। चंद्रयान 3 की सफलता भारत के लिए छोटी बात नहीं है। भारत गरीब देश होने के बावजूद जो सफलता प्राप्त की वह अमेरिका भी नहीं कर पाया है। अनाज क्रांति भारत ने लाया। अमेरिका इसरो की मदद चाहता है।  हम कई देशों के उपग्रह भेजने में मदद कर रहे हैं। यदि विश्व के अग्रणी देशों ने भारत की तकनीकी दी होती तो शायद हम इतनी तरक्की नहीं कर पाते जैसा की इसरों ने चाँद पर चंद्रयान 3 उतारकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
         खगोलशास्त्री सोमन ने कहा कि जो लोग नहीं जानते वह कह रहे हैं कि देश के अनेक इलाकों में पानी , बिजली की समस्या है हम चाँद पर क्यों जा रहे हैं। हम उन्हें बताना चाहते हैं कि यह सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और मेडिकल के भी काम आएगा। इसरो महान वैज्ञानिक विक्रम सारा भाई और भाभा की बड़ी उपलब्धि है। हमारे वैज्ञानिकों ने देखा कि आने वाले समय में युद्ध जमीन में नहीं आसमान में लड़ा जायेगा इसके लिए हमें कुछ करना है। उन्होंने चंद्रयान 3 विषय को लेकर आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले बच्चों को बधाई देते हुए कहा की इनमें से कुछ लोग आगे वैज्ञानिक बनेंगे।
       हिन्दी भाषी एकता परिषद् के मार्गदर्शक ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि इसके संस्थापक स्वर्गीय एड  बी एल शर्मा ने विद्यार्थियों की प्रतिभा उभारने के लिए आज करीब 30 वर्ष पहले जो प्रतिगोगिता शुरू उसका नतीजा है कि बच्चे तरक्की कर रहे है।

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